बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर
भारत ने 10वें दिन के बाद कुल 39 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय दल ने पदक तालिका में छह स्थान की छलांग लगाई और चौथे पायदान पर पहुंच गया। मेजबान स्कॉटलैंड को पीछे छोड़ते हुए भारत ने शीर्ष चार देशों में अपनी जगह मजबूत कर ली है।
पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा लगातार कायम है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने अब तक 61 स्वर्ण, 38 रजत और 50 कांस्य सहित कुल 149 पदक जीतकर पहला स्थान बरकरार रखा है। इंग्लैंड 99 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि कनाडा 57 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने के बाद स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर खिसक गया है। नाइजीरिया, वेल्स और न्यूजीलैंड क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर बने हुए हैं।
भारतीय सफलता की सबसे बड़ी कहानी मुक्केबाजी से निकली, जहां खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने स्वर्ण जीतकर देश का मान बढ़ाया। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी का दबदबा साबित किया। वहीं जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई।
एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। पैरा एथलेटिक्स की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। भारतीय सेना के इस पैरा खिलाड़ी ने अपने संघर्ष और मेहनत से देश को गौरवान्वित किया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में अहम योगदान दिया।
भारत के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए भी सकारात्मक संदेश दिया है। मुक्केबाजी में लगातार स्वर्ण पदकों की बरसात, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड और पैरा खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय खेलों का भविष्य पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहा है।
अब भारतीय दल की नजर बाकी प्रतियोगिताओं पर है, जहां पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों ने यही लय बरकरार रखी तो भारत पदक तालिका में और ऊपर पहुंच सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह ऐतिहासिक दिन भारतीय खेलों के स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
