एआई और इनोवेशन से बढ़ेगी ऑफिस स्पेस की मांग, भारत में जीसीसी की हिस्सेदारी 50% के करीब पहुंचने के संकेत
बीते कुछ वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने परिचालन और रणनीतिक केंद्रों का लगातार विस्तार किया है। वर्ष 2021 से अब तक देश के सात प्रमुख शहरों में जीसीसी ने लगभग 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है। यह इसी अवधि के दौरान हुई कुल ऑफिस स्पेस मांग का करीब 37 प्रतिशत हिस्सा है। केवल वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही जीसीसी द्वारा 1.66 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया, जो कुल ग्रेड-ए लीजिंग का लगभग 46 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में वैश्विक कंपनियों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब जीसीसी की भूमिका पारंपरिक बैक-ऑफिस सेवाओं तक सीमित नहीं रह गई है। वर्तमान समय में ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे उच्च मूल्य वाले कार्यों का संचालन कर रहे हैं। कुशल मानव संसाधन, प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत, मजबूत तकनीकी क्षमता, अनुकूल कारोबारी माहौल और नीतिगत समर्थन ने भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित नवाचार और तकनीकी निवेश ऑफिस स्पेस की मांग को और अधिक गति देने की उम्मीद है।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 से अब तक जीसीसी लीजिंग में टेक्नोलॉजी सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक करीब 39 प्रतिशत रही है। हालांकि अब अन्य क्षेत्रों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र ने कुल लीजिंग में लगभग 22 प्रतिशत योगदान दिया है, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत रही। वर्ष 2021 से 2025 के बीच बीएफएसआई क्षेत्र की लीजिंग लगभग तीन गुना बढ़ी, वहीं इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की मांग 2.5 गुना से अधिक बढ़ने का अनुमान दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि जीसीसी मॉडल अब विभिन्न उद्योगों में तेजी से अपनाया जा रहा है।
शहरों की बात करें तो बेंगलुरु और हैदराबाद अभी भी जीसीसी गतिविधियों के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं। वर्ष 2021 से अब तक कुल लीजिंग में इन दोनों शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके बावजूद अब चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियां नए कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने में तेजी से रुचि दिखा रही हैं। इसके साथ ही ‘हब-प्लस-वन’ रणनीति के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर भी विस्तार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। एआई-आधारित जीसीसी, नैनो और मिड-साइज कैपेबिलिटी सेंटर तथा नए कारोबारी मॉडल आने वाले वर्षों में भारत के ऑफिस स्पेस बाजार और वैश्विक निवेश परिदृश्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
