जमीन अधिग्रहण पर बवाल: देवास में किसानों का भोपाल कूच नाकाम, मुआवजे को लेकर सड़क पर आंदोलन
किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें कानून के अनुसार उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों के अनुसार बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा चाहते हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
सोमवार सुबह किसान ट्रैक्टरों के साथ भोपाल की ओर रवाना होने की तैयारी में थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल पहले से ही शिप्रा चौराहे पर तैनात था। जैसे ही किसानों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों और प्रशासन के बीच बहस हुई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हालांकि, इसके बावजूद किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और बरलाई जागीर में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन ले रही है, लेकिन उसके बदले उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं कर रही। किसानों का कहना है कि उनकी बहु-फसली सिंचित भूमि ही उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत है और इसके अधिग्रहण से उनका भविष्य प्रभावित होगा।
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है और किसानों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास भी जारी है।
वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना इंदौर और देवास क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस आउटर हाईवे का उद्देश्य भारी वाहनों को शहरों के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम हो सके। साथ ही वर्ष 2028 में उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस परियोजना से इंदौर, देवास, सांवेर और देपालपुर क्षेत्र के करीब 39 गांव प्रभावित होंगे।
फिलहाल किसानों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। एक ओर सरकार इस परियोजना को क्षेत्रीय विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए जरूरी बता रही है, वहीं किसान उचित मुआवजे और अपनी जमीन के अधिकारों को लेकर आंदोलन पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत इस विवाद की दिशा तय करेगी।
