July 18, 2026

वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

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नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती का प्रदर्शन किया। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों, सरकार के बड़े विनिर्माण संबंधी फैसलों और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने घरेलू बाजार को सहारा दिया। इसी का परिणाम रहा कि सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए और निवेशकों का भरोसा कायम रहा।

सप्ताह भर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 582.06 अंकों यानी करीब 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए मजबूत स्थिति में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 127.40 अंकों यानी लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में खरीदारी का उत्साह और अधिक बढ़ गया। सेंसेक्स 964.58 अंकों की छलांग लगाकर 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी इस बात का संकेत रही कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी घरेलू निवेशकों का विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है।

सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल पैदा किया। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इन घटनाओं का सीमित प्रभाव देखने को मिला, क्योंकि घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक आर्थिक संकेतकों ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

बाजार को सबसे बड़ा सहारा प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों से मिला। कई बड़ी कंपनियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिससे आईटी और चुनिंदा अन्य क्षेत्रों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी विनिर्माण योजनाओं को मंजूरी दिए जाने से औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल बना। इन घोषणाओं ने दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी क्षेत्र पूरे सप्ताह सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई, जिससे तकनीकी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर रियल्टी, मेटल, डिफेंस, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक जैसे कुछ क्षेत्रों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में ही अधिक भरोसा दिखाया।

हालांकि प्रमुख सूचकांकों में मजबूती रही, लेकिन व्यापक बाजार अपेक्षाकृत कमजोर नजर आया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई। वहीं बाजार की अस्थिरता दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स भी बढ़ा, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक परिस्थितियों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों, प्रबंधन के भविष्य के संकेतों, मानसून की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

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