जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका अनशन देश में पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के समर्थन में चल रहा था। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।
शनिवार सुबह पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो रही थी और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक थी। इससे पहले न्यायालय की ओर से भी उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता पर टिप्पणी की गई थी। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।
वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजी दीपके ने घोषणा की कि वह स्वयं भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की। दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और उनके साथ भी मारपीट हुई। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखने की अपील की।
घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से यह कदम उठाना आवश्यक था, वहीं आंदोलन से जुड़े संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है, जबकि सभी की नजर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन की आगामी दिशा पर बनी हुई है।
