July 16, 2026

MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?

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भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। लगातार कमजोर मानसूनी गतिविधियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। सबसे अधिक असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर दिखाई दे रहा है, जहां जबलपुर सहित 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 270.3 मिमी (10.6 इंच) होनी चाहिए थी। यानी अब तक प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां औसतन 24 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसके विपरीत पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।

19 जुलाई से बदलेगा मौसम, तेज बारिश के आसार
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होने जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में भी नया मौसम तंत्र विकसित हो रहा है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।

आज इन जिलों में हल्की बारिश और आंधी की संभावना
मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश के साथ आंधी चलने का अनुमान है।

वहीं मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच और मंदसौर में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

जुलाई के दूसरे पखवाड़े में राहत मिलने की उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश स्तर पर मानसून की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है, लेकिन पूर्वी जिलों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी निम्न दाब प्रणाली की दिशा और उसकी तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होगा। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

जून के बाद जुलाई में भी बारिश का ग्राफ कमजोर
मौसम विभाग के अनुसार जून में भी सामान्य से कम बारिश हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश के कारण वर्षा का आंकड़ा सुधरा था, लेकिन पिछले सात दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण लगातार तीसरे दिन प्रदेश की कुल वर्षा सामान्य से नीचे बनी हुई है।

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