July 14, 2026

पहलगाम हमले की जांच में अहम मोड़, NIA की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद हाफिज सईद पर गैरहाजिरी में ट्रायल का रास्ता साफ

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नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बड़ा कदम उठाते हुए आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में हाफिज सईद को इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। इसके बाद संबंधित अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है। इस आदेश के साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने और गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

एनआईए ने अदालत में लगभग 60 पृष्ठों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि पहलगाम आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और इसमें हाफिज सईद की अहम भूमिका रही। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर उसके खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि मामले में न्यायिक कार्रवाई बाधित न हो।

अदालत में दायर आवेदन में एनआईए ने यह भी कहा कि हाफिज सईद वर्तमान में पाकिस्तान में है और उसे भारत लाना फिलहाल संभव नहीं है। एजेंसी के अनुसार, उसे भारत लाने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में नए आपराधिक कानूनों के तहत गैरहाजिरी में मुकदमा चलाने का प्रावधान लागू किया जाना उचित होगा। अदालत ने एजेंसी की दलीलों से सहमति जताते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।

न्यायालय के आदेश के बाद यदि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बावजूद आरोपी अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होता है, तो उसे भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई भी आगे बढ़ सकती है। इसके बाद अदालत उसके बिना उपस्थित हुए भी मामले की सुनवाई जारी रख सकती है। यह प्रावधान हाल ही में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के तहत शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखना है, जहां आरोपी जानबूझकर न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं होता।

एनआईए की पहली चार्जशीट में भी इस मामले में कई आरोपियों को नामजद किया गया था। जांच एजेंसी ने तीन पाकिस्तानी आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तान में बैठे कथित आतंकी संचालकों और स्थानीय सहयोगियों को भी आरोपी बनाया है। एजेंसी का दावा है कि इन सभी की भूमिका हमले की योजना बनाने, उसे अंजाम देने और आतंकियों को सहायता उपलब्ध कराने में रही।

नए कानूनों के तहत ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ का प्रावधान ऐसे मामलों में लागू किया जा सकता है, जहां आरोपी देश से फरार हो, अदालत में जानबूझकर पेश न हो और उसके खिलाफ गंभीर अपराधों के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों। इसके लिए पहले समन और वारंट जारी किए जाते हैं। यदि इसके बावजूद आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो उसे भगोड़ा घोषित कर उसकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया जा सकता है।

गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक जांच शुरू की थी। बाद में भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के तहत सीमापार आतंकी ढांचों को निशाना बनाते हुए अभियान भी चलाया। अब एनआईए की सप्लीमेंट्री चार्जशीट और अदालत के आदेश के बाद इस मामले की कानूनी प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है और आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

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