गुजरात वन विभाग की नई डिजिटल पहल, सिर्फ एक कॉल या मैसेज से मिलेंगी 453 नर्सरियों और पौधों की पूरी जानकारी
नई व्यवस्था के अनुसार नागरिक निर्धारित मोबाइल नंबर पर कॉल करते हैं तो कॉल स्वतः समाप्त हो जाती है और उनके मोबाइल पर एक वेब लिंक वाला संदेश प्राप्त होता है। इस लिंक को खोलने पर संबंधित क्षेत्र की सामाजिक वनीकरण विभाग की नर्सरियों की संपर्क जानकारी, गूगल मैप पर उनका स्थान तथा संबंधित वन अधिकारियों के मोबाइल नंबर जैसी उपयोगी जानकारी उपलब्ध हो जाती है। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति उसी नंबर पर ‘HI’ लिखकर एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश भेजता है तो भी उसे यही डिजिटल सुविधा प्राप्त होती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केवल नर्सरियों की जानकारी ही नहीं, बल्कि रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, इको-टूरिज्म स्थलों और वन विभाग की अन्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। इससे नागरिकों को विभिन्न वन सेवाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और अधिकांश जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल व्यापक वृक्षारोपण अभियान को गति देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अधिक से अधिक लोगों को पौधे उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार इस वर्ष सामाजिक वनीकरण कार्यक्रम के तहत करोड़ों पौधे वितरण के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि नागरिकों को बड़े स्तर पर पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्यभर में कुल 453 नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। यहां नागरिक पौधों के आकार के अनुसार मामूली कीमत पर गुणवत्तापूर्ण पौधे खरीद सकते हैं। कुछ श्रेणियों के पौधों का निःशुल्क वितरण भी किया जाता है। जो नागरिक रियायती दर या निःशुल्क पौधे प्राप्त करना चाहते हैं, वे अपने जिले के संबंधित वन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
विभाग ने शिकायतों और अतिरिक्त सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं और वन विभाग से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल सेवा और हेल्पलाइन दोनों को नागरिकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है तथा प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इनका उपयोग कर रहे हैं।
वन विभाग ने बताया कि पूरी डिजिटल प्रणाली विभाग द्वारा स्वयं विकसित और संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य बिना अतिरिक्त लागत के आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ बनाना है। विभाग का मानना है कि इस पहल से वृक्षारोपण अभियान को नई गति मिलेगी और अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे।
