July 3, 2026

किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

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नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में अमित कुमार का नाम उन चुनिंदा गायकों में लिया जाता है, जिन्होंने पारिवारिक विरासत से आगे बढ़कर अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी मधुर आवाज, सहज गायकी और भावपूर्ण प्रस्तुति के दम पर उन्होंने 1980 के दशक में एक ऐसी जगह बनाई, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच विशेष महत्व रखती है। 3 जुलाई 1952 को कोलकाता में जन्मे अमित कुमार का जीवन संगीत, अभिनय और रचनात्मकता से भरपूर रहा।

अमित कुमार के पिता महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार तथा मां प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका रूमा गुहा ठाकुरता थीं। ऐसे संगीतपूर्ण वातावरण में पले-बढ़े अमित का रुझान बचपन से ही गायन और अभिनय की ओर था। कोलकाता में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति को काफी सराहना मिली और उनकी प्रतिभा धीरे-धीरे फिल्म जगत का ध्यान आकर्षित करने लगी।

फिल्मी दुनिया में उनका शुरुआती सफर अभिनय से शुरू हुआ। कम उम्र में उन्होंने अपने पिता के निर्देशन वाली फिल्म में अभिनय किया और इसके बाद बाल कलाकार के रूप में अपना पहला गीत भी रिकॉर्ड किया। हालांकि पार्श्वगायक के रूप में पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपनी गायकी को निखारने पर पूरा ध्यान दिया।

उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें संगीतकार आरडी बर्मन के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उस समय वह बेहद घबराए हुए थे, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यही अवसर आगे चलकर उनके संगीत सफर की मजबूत नींव बना और उन्हें बड़े संगीतकारों के साथ काम करने का अवसर मिला।

साल 1981 में एक लोकप्रिय फिल्म के गीत ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई। इसके बाद उनकी आवाज कई युवा अभिनेताओं की पहचान बन गई। रोमांटिक, भावनात्मक और ऊर्जावान गीतों में उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। 1980 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत गाकर खुद को उस दौर के सबसे लोकप्रिय पार्श्वगायकों में स्थापित कर लिया।

उनके करियर का एक ऐतिहासिक क्षण वह भी रहा जब प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक की दौड़ में उनका मुकाबला अपने ही पिता किशोर कुमार से हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद पिता और पुत्र का वह भावनात्मक पल भारतीय फिल्म संगीत के सबसे यादगार क्षणों में गिना जाता है। यह उपलब्धि अमित कुमार के स्वतंत्र और सफल करियर की बड़ी पहचान बन गई।

पिता किशोर कुमार के निधन के बाद उन्होंने उनकी अधूरी फिल्म को पूरा करने की जिम्मेदारी निभाई। बाद में अपने मार्गदर्शक आरडी बर्मन के निधन के पश्चात उन्होंने धीरे-धीरे पार्श्वगायन से दूरी बनाई और स्वतंत्र संगीत, लाइव कॉन्सर्ट तथा अपने संगीत प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया। आज भी अमित कुमार की आवाज और उनके गीत भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि विरासत प्रेरणा दे सकती है, लेकिन स्थायी पहचान केवल प्रतिभा, मेहनत और समर्पण से ही बनती है।

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