July 1, 2026

उत्तराखंड पहुंचा मानसून: अब अगले इतने दिनों तक झमाझम बरसेंगे बदरा

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  • भारी बारिश का अलर्ट जारी, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा

  •  बारिश ने बदली कुमाऊं की तकदीर…

लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मंगलवार को उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में प्रवेश कर लिया। मौसम विभाग ने आज से अगले चार दिनों तक प्रदेश के कुछ इलाकों में बेहद भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की है।

जबकि इससे पहले ही सोमवार देर रात मानसून ने कुमाऊं में दस्तक देकर मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। वहीं मंगलवार को कुमाऊं मंडल के सभी जिलों में कहीं रुक-रुक कर तो कहीं लगातार बारिश होती रही। इससे तापमान में 12 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले चार से पांच दिनों तक इसी तरह बारिश का दौर जारी रहेगा।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के कई हिस्सों से गुजर रही है और अगले दो से तीन दिनों में यह शेष क्षेत्रों में भी पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। वर्तमान मौसम प्रणाली के तहत पंजाब से लेकर उत्तर बंगाल की खाड़ी तक मौसमी द्रोणिका सक्रिय है, जिससे प्रदेश में पर्याप्त नमी पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही दो जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी असर दिखाएगा, जिससे बारिश और तेज हो आएगी।

मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि एक जुलाई को देहरादून और बागेश्वर जनपद के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

दो जुलाई को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर में भारी से बेहद भारी वर्षा का अनुमान है। तीन और चार जुलाई को भी कई पर्वतीय जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।

खतरा: भूस्खलन और बाढ़ का 
मौसम विभाग ने चेताया है कि लगातार बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और मलबा आने की घटनाएं हो सकती हैं। नदियों और गदेरों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा भी बना रहेगा। कई स्थानों में सड़कें और राजमार्ग बाधित हो सकते हैं, जिससे आवागमन प्रभावित होगा। ऐसे में प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से अनावश्यक यात्रा से बचने और सतर्क रहने की अपील की है। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। भारी बारिश के दौरान नदी-नालों से दूर रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करने की सलाह दी गई है।

निर्देश: किसानों और एजेंसियों के लिए
किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी करने और फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। वहीं बांध, बैराज और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सतर्क रहने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देश
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून के जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में अगले कुछ दिन कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसे देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने सभी जिलाधिकारियों को एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी की जाए, राहत व बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा जाए। सड़क अवरुद्ध होने की स्थिति में संबंधित विभाग तत्काल मार्ग खोलने की कार्रवाई करें। सभी विभागीय अधिकारी, आपदा प्रबंधन से जुड़े नोडल अधिकारी एवं आईआरएस प्रणाली के अधिकारी सक्रिय रहें तथा अपने मोबाइल एवं संचार माध्यम लगातार चालू रखें।

इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियों पर मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक प्रतिबंध लगाने, विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने लोगों से अपील की है कि मौसम विभाग व प्रशासन की जारी एडवाइजरी का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन अथवा आपदा नियंत्रण कक्ष से तत्काल संपर्क करें।

कुमाऊं की बदली तकदीर…
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक डॉ. चंद्र सिंह ने बताया कि इस बार मानसून कुछ विलंब से पहुंचा है। सोमवार रात मानसून ने बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर से उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में प्रवेश किया। प्रदेश में हरिद्वार को छोड़कर सभी जिलों को अब मानसून ने कवर कर लिया लिया है। अगले चार पांच दिनों तक बारिश का दौर चलेगा। इधर आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह आठ बजे तक नैनीताल में सर्वाधिक 11 और हल्द्वानी में आठ मिलीमीटर बारिश हुई है। इस दौरान हल्द्वानी का अधिकतम तापमान 26.4 और न्यूनतम 23.5 डिग्री रहा।

वरदान साबित होगी बारिश
जून के महीने में गर्मी के कारण लोग त्रस्त तो थे ही बारिश न होने के कारण खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही थी। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अब मानसूनी बारिश शुरू होने से खेती-बाड़ी को भी फायदा होगा। पर्वतीय क्षेत्रों में मडुवा और आलू की बुवाई आसान होगी वहीं मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश का फायदा काश्तकारों को मिलेगा।

हल्द्वानी: एक सप्ताह का अधिकतम तापमान

24 जून – 35 डिग्री

25 जून – 36 डिग्री

26 जून – 40 डिग्री

27 जून – 40 डिग्री

28 जून – 39 डिग्री

29 जून – 32.8 डिग्री

30 जून – 26.4 डिग्री

प्रतिबंध: आज से गौला बैराज में घूमने पर 
सिंचाई विभाग ने मानसून को देखते हुए बुधवार से गौला बैराज में घूमने वालों पर प्रतिबंध लगा दिया है। काठगोदाम स्थित गौला बैराज में पर्यटकों के साथ ही शहरवासी अक्सर घूमने जाते हैं। टिकट लेने के बाद लोग कैंटीन के साथ ही बैराज से सटी गौला नदी में प्रवेश कर रहे हैं। विभाग के हूटर बजाने के साथ ही सख्त चेतावनी देने के बावजूद लोग बाज नहीं आ रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए कैंटीन को बंद करने का आदेश जारी किया गया है। सिंचाई विभाग के ईई दिनेश रावत ने बताया कि वर्षाकाल में नदी के आसपास हादसों की आशंका बनी रहती है। पानी बढ़ने पर बैराज के गेट खोलने पड़ते हैं। अगले आदेशों तक यह आदेश लागू रहेगा।

कीचड़ से सनी सड़कों पर चलना दूभर
हल्द्वानी में मंगलवार की सुबह से हुई बारिश से जहां शहर के तापमान में गिरावट आई, तो वहीं  जलभराव और बदहाल सड़कों ने लोगों को परेशान किया। सड़कें इस दौरान  कीचड़ से सन गईं और लोगों का चलना दूभर हो गया। खोदी गई सड़कों ने इंदिरानगर, राजपुरा, जज फार्म, बनभूलपुरा,  बद्रीपुरा, राजपुरा,  बिठौरिया आदि क्षेत्रों में मुसीबत खड़ी कर दीं। वहीं कचरा जमने से शहर में कई स्थानों पर सिंचाई गूलों में पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहता रहा। बारिश के बाद सुशीला तिवारी अस्पताल के पास वाली नहर में  कचरा जमा हो गया। इस नहर में पेड़ों की टहनियां गिरी नजर आई। इससे पानी की निकासी प्रभावित रही।

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