July 2, 2026

ग्रहों के सेनापति और राजा बदलेंगे अपनी चाल, जगन्नाथ रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा सहित जुलाई में सजेंगे महापर्व

0
4-1782889534
नई दिल्ली । अंग्रेजी कैलेंडर के सातवें महीने जुलाई की शुरुआत के साथ ही भारतीय जनमानस में आध्यात्मिक और धार्मिक उत्सवों का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष एक विशेष ज्योतिषीय और खगोलीय संयोग बन रहा है, जिसके तहत हिंदू पंचांग का पवित्र आषाढ़ मास लगभग पूरे जुलाई महीने में व्याप्त रहेगा। आषाढ़ महीने का प्रारंभ 30 जून से हो चुका है, जो आगामी 29 जुलाई तक अनवरत चलेगा। सनातन धर्म में आषाढ़ मास को विशेष तप, साधना और आत्मशुद्धि का समय माना गया है। यही कारण है कि इस पूरे महीने में देश भर में कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे, जिससे चारों ओर एक उत्सवमयी और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिलेगा।

मध्य प्रदेश । धार्मिक दृष्टि से इस महीने की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घटना ‘चातुर्मास’ का प्रारंभ होना है। आगामी 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे, जिसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों की अवधि में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है और लोग अपना ध्यान केवल ईश्वर भक्ति और सात्विक जीवन पर केंद्रित करते हैं। इसके अलावा, महीने के पूर्वार्ध में 3 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी, 10 जुलाई को योगिनी एकादशी और 12 जुलाई को मासिक शिवरात्रि का व्रत श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

इस पवित्र महीने में तीर्थ स्थलों और प्रमुख मंदिरों में भारी भीड़ जुटने की संभावना है, क्योंकि 15 जुलाई से जहां आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है, वहीं ठीक अगले दिन यानी 16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस रथयात्रा को देखने और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। महीने के अंतिम चरण में 28 जुलाई को कोकिला व्रत रखा जाएगा और अगले दिन 29 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूर्णिमा का महापर्व मनाया जाएगा। इस दिन सनातन परंपरा के अनुसार शिष्य अपने गुरुओं का पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं, जिससे इस महीने का धार्मिक समापन बेहद गरिमापूर्ण ढंग से होगा।

धार्मिक व्रतों के साथ-साथ ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर भी जुलाई का यह महीना देश-दुनिया और सभी 12 राशियों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बदलावों वाला साबित होने जा रहा है। इस दौरान सौरमंडल के कई बड़े और प्रभावशाली ग्रह अपनी चाल, राशि और नक्षत्रों में परिवर्तन करेंगे। सबसे पहले 4 जुलाई को सुख-सुविधाओं के कारक शुक्र ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से मौजूद केतु के साथ उनकी युति बनेगी। इसके तुरंत बाद 7 जुलाई को बुद्धि और वाणी के देवता बुध ग्रह अपनी वक्री अवस्था में ही मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे, जो व्यापार और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

ग्रहों के इस बड़े फेरबदल में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना 14 जुलाई को होगी, जब ज्ञान और सुख-सौभाग्य के प्रदाता गुरु ग्रह (बृहस्पति) अस्त हो जाएंगे और अगस्त के मध्य तक इसी स्थिति में रहेंगे। गुरु के अस्त होने से धार्मिक अनुष्ठानों की पद्धतियों में कुछ समय के लिए बदलाव आता है। इसके पश्चात 16 जुलाई को ग्रहों के राजा सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘कर्क संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है। महीने के अंत में एक और बड़ा ज्योतिषीय बदलाव 27 जुलाई को देखने को मिलेगा, जब न्याय के देवता शनि देव कुंभ राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलना शुरू कर देंगे। शनि की यह वक्री चाल साल के अंत तक जारी रहेगी, जिसका गहरा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देश के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *