June 30, 2026

25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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महोबा  महोबा जिले के कबरई विकासखंड के सबसे बड़े गांव ग्योंडी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब ग्रामीणों के सब्र की सीमा पार कर चुकी है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टरों और जरूरी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को न तो नियमित चिकित्सक मिलते हैं और न ही स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की इसी बदहाली के विरोध में बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ग्योंडी गांव ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जबकि गंभीर मरीजों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यक दवाइयों की कमी जांच सुविधाओं का अभाव और साफ सफाई बिजली तथा पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है।

बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखीं। संगठन ने अस्पताल के सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने नियमित डॉक्टरों और स्टाफ नर्स की तैनाती सुनिश्चित करने चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा शुरू करने आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा अस्पताल में साफ सफाई बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।

संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिले में चक्का जाम और बड़े स्तर पर प्रदर्शन भी किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित रखना गंभीर लापरवाही है और इसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और स्टाफ की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान का इंतजार हजारों लोगों को है।

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