2 करोड़ की जमीन के लिए 1000 किलोमीटर का सफर, ICU एंबुलेंस से इंदौर पहुंचीं बुजुर्ग महिला; बोलीं- मेरा प्लॉट वापस दिला दीजिए
परिजनों के अनुसार विवाद गांधीनगर क्षेत्र स्थित दो प्लॉटों को लेकर है, जो वर्ष 1969 में एक आवासीय सहकारी संस्था द्वारा बुजुर्ग महिला के नाम आवंटित किए गए थे। बाद में संबंधित संपत्तियों का नामांतरण भी विधिवत उनके नाम पर दर्ज किया गया था। परिवार का दावा है कि वे कई दशकों से इन जमीनों के वैध मालिक रहे हैं और सभी आवश्यक दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि वर्षों पहले जब वे बिजनौर में रहने चले गए थे, तब संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी कुछ रिश्तेदारों को सौंपी गई थी। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने कथित रूप से सोसायटी प्रबंधन के साथ मिलीभगत की और फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। परिवार का दावा है कि वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से विवादित संपत्ति की कीमत लगभग दो करोड़ रुपये है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि विभिन्न स्तरों पर आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे उन्हें न्याय के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा।
स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रही बुजुर्ग महिला को आखिरकार परिवार विशेष चिकित्सा सुविधाओं से लैस आईसीयू एंबुलेंस में इंदौर लेकर पहुंचा। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी पूरी बात रखी और जमीन वापस दिलाने की मांग की। परिवार का कहना है कि यह केवल संपत्ति का विवाद नहीं, बल्कि कई वर्षों से चल रही कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का मुद्दा है, जिसने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है।
जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने भी बुजुर्ग महिला की स्थिति और उनके संघर्ष को गंभीरता से देखा। लंबी दूरी तय कर स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद न्याय की उम्मीद में उनका इंदौर पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो उन्हें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
मामले में परिवार की ओर से प्रस्तुत आवेदन प्राप्त करने के बाद जिला प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और आरोपों की समीक्षा कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है। परिवार का कहना है कि अब उनकी अंतिम उम्मीद प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है और उन्हें भरोसा है कि निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
यह मामला एक बार फिर संपत्ति विवादों, दस्तावेजों की सुरक्षा और लंबे समय तक लंबित रहने वाली शिकायतों को लेकर कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल परिवार प्रशासनिक जांच के परिणाम का इंतजार कर रहा है और उम्मीद जता रहा है कि वर्षों से चली आ रही उनकी परेशानी का समाधान जल्द निकलेगा।
