June 19, 2026

ढाबा संचालक को उम्रकैद: महिला से दुष्कर्म और जातिसूचक प्रताड़ना के मामले में उज्जैन कोर्ट का बड़ा फैसला

0
untitled-1781864918

मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले में वर्ष 2024 में सामने आए दुष्कर्म और अत्याचार के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महिला के साथ दुष्कर्म करने और जातिसूचक अपमान करने के मामले में दोषी पाए गए आरोपी को अदालत ने कठोर दंड देते हुए समाज में ऐसे अपराधों के प्रति सख्त संदेश दिया है।

मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया के अनुसार यह घटना 15 सितंबर 2024 की है। पीड़िता अपने एक परिचित युवक के साथ मोटरसाइकिल से महिदपुर क्षेत्र स्थित घड़ी वाले बाबा के दर्शन करने गई थी। दर्शन के बाद दोनों रात करीब 10 बजे माकड़ौन थाना क्षेत्र में स्थित एक ढाबे पर भोजन करने पहुंचे। यह ढाबा आरोपी लाखन सिंह गुर्जर द्वारा संचालित किया जाता था।

अभियोजन के अनुसार भोजन करने के बाद जब दोनों ने बिल का भुगतान करना चाहा तो आरोपी ने पैसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने दोनों पर रात में वहीं रुकने का दबाव बनाया। जब पीड़िता और उसके साथी ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए दोनों को अपमानित भी किया।

मामले में यह भी सामने आया कि आरोपी ने हथियार दिखाकर पीड़िता के साथी को वहां से भगा दिया। इसके बाद उसने महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किया और घटना की जानकारी किसी को देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। घटना के बाद पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य पेश किए, जिन्हें न्यायालय ने स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषी माना।

मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी लाखन सिंह गुर्जर (37), निवासी ग्राम झिरनिया, थाना माकड़ौन, जिला उज्जैन को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई तथा 6 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।

इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय के निर्णय ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और जातिगत अत्याचार जैसे गंभीर मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *