June 18, 2026

रणथंभौर एक्सप्रेस में धुआं उठते ही मची भगदड़: यात्री पटरियों पर कूदे, 10 मिनट बाद दूसरी ट्रेन पहुंची, मुरैना हादसे जैसी स्थिति बनी

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मध्यप्रदेश । रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र स्थित लूणी-रीछा स्टेशन के पास गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब इंदौर से जोधपुर जा रही रणथंभौर एक्सप्रेस के जनरल कोच के पहियों से अचानक धुआं निकलने लगा। सुबह करीब पौने 10 बजे हुई इस घटना ने यात्रियों को दहशत में डाल दिया और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए सामान सहित ट्रेन से उतरकर पटरियों पर कूद पड़े।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन स्टेशन के पास पहुंची ही थी कि जनरल कोच के पहियों से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ यात्रियों ने इसे आग लगने की घटना समझ लिया, जिसके बाद कोचों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते यात्री ट्रेन से बाहर निकलने लगे और कई लोग सीधे रेलवे ट्रैक पर उतर गए। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लूणी-रीछा स्टेशन पर रणथंभौर एक्सप्रेस का निर्धारित ठहराव नहीं है। अचानक सिग्नल रेड होने के कारण लोको पायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाने पड़े। इसी दौरान एक पहिए के हार्ड एक्सल पर ब्रेक शू जाम होकर चिपक गया, जिससे अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ और धुआं निकलने लगा। हालांकि यह तकनीकी खराबी थी और आग लगने जैसी कोई बड़ी घटना नहीं हुई।

घटना की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी अग्निशमन यंत्र लेकर मौके पर पहुंचे और तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया। फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से धुआं उठने की समस्या पर काबू पाया गया। करीब 20 मिनट तक ट्रेन स्टेशन पर खड़ी रही, जिसके बाद तकनीकी जांच पूरी कर उसे सुरक्षित आगे के लिए रवाना कर दिया गया।

इस घटना के दौरान सबसे चिंताजनक बात यह रही कि यात्रियों की अफरा-तफरी के बीच करीब 10 मिनट बाद कोटा-उज्जैन मेमू ट्रेन भी उसी स्टेशन पर पहुंच गई। सौभाग्य से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन हालात कुछ समय के लिए बेहद खतरनाक बन गए थे। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में बिना पुष्टि के पटरियों पर न उतरें और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।

यह घटना हाल ही में मुरैना में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे की याद भी ताजा कर गई। 14 जून को खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल फटने के बाद आग लगने की अफवाह फैल गई थी। घबराकर कई यात्री ट्रेन से उतरकर दूसरे ट्रैक पर पहुंच गए थे, जहां दूसरी ट्रेन की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे ने रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जागरूकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

गौरतलब है कि इसी लूणी-रीछा क्षेत्र में पिछले महीने राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच में भी आग लगने की घटना सामने आई थी। ऐसे में एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस बार रेलवे कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यात्रियों में भय और असुरक्षा की भावना जरूर देखने को मिली।

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