June 14, 2026

होर्मुज संकट के बीच मानवीय त्रासदी: ओमान के पास खड़े जहाज पर भारतीय नाविक की मौत, पार्थिव शरीर को लेकर इंतजार जारी

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नई दिल्ली । ओमान के डुक्म पोर्ट के निकट खड़े एक व्यापारी जहाज पर तैनात भारतीय अधिकारी की मृत्यु के बाद समुद्री क्षेत्र में उत्पन्न मानवीय चुनौतियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। जहाज पर मौजूद भारतीय सेकंड ऑफिसर निशांत उर्थनाथन की बीमारी के कारण मौत हो गई, जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने और स्वदेश वापस भेजने को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो गई है।

करीब 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन तमिलनाडु के निवासी थे और एमटी सेलेस्टियल नामक जहाज पर सेकंड ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार 11 जून को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध न होने और परिस्थितियों के प्रतिकूल होने के बीच उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद से उनका शव जहाज पर ही रखा गया है, जबकि जहाज अभी भी ओमान के तट के पास खड़ा हुआ है।

स्थिति को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि जहाज पर शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कोल्ड स्टोरेज या विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में क्रू सदस्यों ने उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। बताया जा रहा है कि ठंडे पानी की बोतलों और अस्थायी उपायों के जरिए शव को संरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक कारगर नहीं रह सकती।

जहाज के कप्तान ने एक वीडियो संदेश जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों से तत्काल सहायता की मांग की है। उन्होंने बताया कि जहाज पर मौजूद कर्मचारी बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और पार्थिव शरीर को सम्मानजनक ढंग से सुरक्षित रखने के लिए तत्काल मदद की आवश्यकता है। कप्तान ने यह भी कहा कि समय बीतने के साथ स्थिति और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

इस बीच भारतीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम शुरू कर दिए हैं। संबंधित एजेंसियां जहाज के प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया पर काम कर रही हैं। परिवार तक भी स्थिति की जानकारी पहुंचाई गई है और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्रों में तनाव और अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है। क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अनेक समुद्री कर्मियों को लंबे समय तक समुद्र में ही रहना पड़ रहा है। कई जहाज निर्धारित समय से अधिक अवधि तक विभिन्न बंदरगाहों और समुद्री मार्गों में फंसे हुए हैं, जिससे कर्मचारियों के सामने मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ने वाले प्रभावों के साथ-साथ ऐसे घटनाक्रम मानवीय दृष्टिकोण से भी गंभीर चिंता का विषय हैं। समुद्र में फंसे कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सहायता व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता बन गया है।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता निशांत उर्थनाथन के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक स्वदेश पहुंचाना और उनके परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही यह घटना समुद्री क्षेत्र में कार्यरत हजारों कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े व्यापक प्रश्न भी सामने ला रही है।

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