वायुसेना का एएन-32 विमान क्रैश होने से देश ने खोए पांच वीर सपूत, पुराने पड़ चुके परिवहन बेड़े को बदलने की प्रक्रिया तेज
हादसे का शिकार हुए बत्तीस वर्षीय स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के कंडेरा गांव के निवासी थे और उनका परिवार वर्तमान में उत्तराखंड के देहरादून में निवास कर रहा है। प्रशांत अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और करीब दो वर्ष पूर्व ही उनका विवाह हुआ था। उनकी पत्नी असम में ही वकालत के पेशे से जुड़ी हैं और घटना के वक्त वहीं उनके साथ रह रही थीं। सेवानिवृत्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के डिप्टी कमांडेंट उमेश सिंह के पुत्र प्रशांत की शहादत की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
इस हादसे में बिहार ने भी अपने दो वीर सपूतों को खो दिया है। जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड अंतर्गत बनवरिया गांव के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार वर्ष 2021 में वायुसेना का हिस्सा बने थे। उन्होंने दुर्घटना से महज दो घंटे पहले ही अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की थी और व्यस्तता का हवाला देकर बाद में फोन करने की बात कही थी। वहीं, भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड के कायमनगर निवासी बाइस वर्षीय अग्निवीर वायु दानिश आलम भी इस हादसे में वीरगति को प्राप्त हुए हैं। दानिश अक्टूबर 2025 में वायुसेना में भर्ती हुए थे और असम का जोरहाट एयरबेस उनकी पहली पोस्टिंग का स्थान था।
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के नावां क्षेत्र के पांचोता गांव में भी इस दुर्घटना के बाद मातम पसरा हुआ है, जहां के निवासी जांबाज अग्निवीर खेमाराम कुमावत इस विमान में तैनात थे। उनकी शहादत की खबर से पूरे गांव में शोक की स्थिति है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के टप्पल क्षेत्र स्थित सालपुर गांव के निवासी सार्जेन्ट जितेंद्र शर्मा भी इस हादसे में शहीद हो गए हैं। जितेंद्र वर्ष 2015 में वायुसेना में शामिल हुए थे और हाल ही में छुट्टी के दौरान उनकी शादी तय की गई थी, जिसकी तैयारियां घर में चल रही थीं।
यह दुर्घटना वर्ष 2026 में भारतीय वायुसेना के विमानों से जुड़ी पांचवीं बड़ी घटना है। चालू वर्ष में जनवरी से अब तक प्रयागराज में एक प्रशिक्षण विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने, पश्चिमी मोर्चे पर एक तेजस विमान के रनवे से बाहर जाने, मार्च में असम के कार्बी आंगलोंग में सुखोई विमान के क्रैश होने और अप्रैल में पुणे में सुखोई की हार्ड लैंडिंग जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कार्बी आंगलोंग हादसे में भी दो अधिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
बार-बार हो रहे इन हादसों के बीच वायुसेना के परिवहन बेड़े के आधुनिकीकरण की आवश्यकता को और अधिक बल मिला है। रक्षा रणनीतियों के अनुसार, वायुसेना के पुराने पड़ चुके एएन-32 और एवरो विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए अत्याधुनिक और नई पीढ़ी के एयरबस सी-295 सैन्य परिवहन विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है। भारत ने कुल छप्पन सी-295 विमानों की खरीद का समझौता किया है, जिसमें से सोलह विमान सीधे स्पेन से निर्मित होकर आ रहे हैं, जबकि शेष चालीस विमानों का निर्माण गुजरात के वडोदरा में घरेलू स्तर पर टाटा और एयरबस के संयुक्त उपक्रम द्वारा किया जा रहा है।
