June 9, 2026

'बुढ़वा मंगल' पर महाबली के चमत्कारी दोहों का महत्व, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़

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नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का अत्यधिक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। आज छठे बड़े मंगल के पावन अवसर पर तड़के से ही देश के तमाम छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना करने से भक्तों को जीवन की हर कसौटी पर विजय प्राप्त होती है। यदि कोई श्रद्धालु समय के अभाव में संपूर्ण हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कर पाता है, तो उसके कुछ अत्यंत चमत्कारी दोहों और चौपाइयों के मानसिक जाप से भी अद्वितीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में जुटे युवाओं के लिए हनुमान चालीसा का प्रारंभिक दोहा ‘बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार। बल-बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।’ एक अचूक महामंत्र की तरह कार्य करता है। इस दोहे का सीधा अर्थ है कि साधक स्वयं को बुद्धिहीन मानकर पवनपुत्र का स्मरण कर रहा है, ताकि उसे बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिल सके। बड़े मंगल के दिन स्नान के उपरांत तुलसी की माला से इस दोहे का कम से कम 108 बार जाप करने से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और किसी भी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

इसके अतिरिक्त, जो लोग अज्ञात भय, मानसिक अवसाद या बुरे सपनों से परेशान रहते हैं, उनके लिए ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावे’ की चौपाई को संजीवनी माना गया है। इस चौपाई के नियमित पाठ से किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या ऊपरी बाधा साधक के समीप नहीं फटकती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में आज के दिन भक्तों को इस चौपाई के सामूहिक कीर्तन के जरिए भयमुक्त होने का संकल्प लेते देखा जा रहा है, जिससे आंतरिक शांति और गहरी नींद की प्राप्ति होती है।

शारीरिक व्याधियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों के लिए ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा’ का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होता है। इस पंक्ति के निरंतर जाप से असाध्य रोगों के कष्टों में कमी आती है और चिकित्सा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा मिलने से रोगी तेजी से स्वस्थ होने लगता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में पनपने वाले मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करने में भी यह चौपाई अत्यंत प्रभावी साबित हुई है, जिसके चलते आज भंडारे और पूजा पंडालों में इसका विशेष गायन किया जा रहा है।

सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए ‘महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी’ का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह चौपाई मानव मस्तिष्क से दुर्बुद्धि और द्वेष की भावनाओं का समूल नाश कर सद्बुद्धि का संचार करती है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के अनैतिक विचारों से बचने तथा ईमानदारी से तरक्की पाने के लिए इस दोहे को आत्मसात करना अनिवार्य माना गया है। कुल मिलाकर, यह छठा बड़ा मंगल भक्तों के लिए दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का एक बड़ा माध्यम बनकर आया है।

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