मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान
बताया जा रहा है कि अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में देर रात आग लग गई थी। आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र में धुआं फैलने लगा, जिससे वहां भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे और धुएं के कारण उनका दम घुटने लगा। इस हादसे में पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है।
इसी आईसीयू में छपरा मेघ क्षेत्र की निवासी 95 वर्षीय राधा देवी भी भर्ती थीं। उम्र और बीमारी के बावजूद उन्होंने सबसे पहले स्थिति की गंभीरता को समझा। परिजनों के अनुसार, धुआं फैलते ही उन्होंने अपने चेहरे से ऑक्सीजन मास्क हटाया और स्वयं बाहर निकलकर नर्स को आग लगने की जानकारी दी। उनके इस कदम के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
राधा देवी ने स्थानीय बज्जिका बोली में घटना का वर्णन करते हुए बताया कि अचानक धुआं फैलने लगा और आसपास अंधेरा सा महसूस होने लगा। उन्होंने कहा कि आग कैसे लगी, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन धुआं देखते ही वह बाहर निकलीं और तुरंत नर्स को इसकी सूचना दी। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने स्थिति की जांच की और राहत कार्य शुरू किए।
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि राधा देवी समय रहते सतर्कता नहीं दिखातीं, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। रात करीब साढ़े तीन बजे आग लगने की बात सामने आई, जबकि कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रशासन और अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के साथ-साथ अस्पताल में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। बचाव दल ने करीब 15 से 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि धुएं और आग की चपेट में आने से कई मरीज गंभीर रूप से प्रभावित हुए, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है।
घटना के बाद अस्पताल के आईसीयू की तस्वीरों ने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया है। आग में बेड, चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन बुरी तरह जल गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
इस दर्दनाक हादसे के बीच राधा देवी की सतर्कता और साहस ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में जागरूकता और त्वरित निर्णय कई जिंदगियों को बचा सकते हैं। उनकी भूमिका को स्थानीय लोग और प्रभावित परिवार एक असाधारण मानवीय उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जिसने एक बड़े हादसे को और भयावह होने से रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
