June 3, 2026

आजीविका मिशन बना उम्मीद की नई किरण, रेखा बेसरा ने खड़ा किया सफल मुर्गी पालन व्यवसाय

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नई दिल्ली । ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित विभिन्न योजनाएं अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की कहानी लिख रही हैं। झारखंड के जामताड़ा जिले की रहने वाली रेखा बेसरा इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं। कभी परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली रेखा आज सफल मुर्गी पालन उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी यह सफलता न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव लेकर आई है, बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

कुछ वर्ष पहले तक रेखा बेसरा का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें और उनके पति को मजदूरी करनी पड़ती थी। सीमित आय के कारण बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था। ऐसे समय में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के माध्यम से उन्हें ग्रामीण आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने समूह की सदस्यता ग्रहण की और उपलब्ध प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रेखा ने बैंक से ऋण लेकर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के कारण उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। वर्तमान में उनके पास लगभग 100 मुर्गियां हैं और उनका पोल्ट्री व्यवसाय लगातार विस्तार कर रहा है। इससे होने वाली नियमित आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में काफी मजबूत बना दिया है।

मुर्गी पालन व्यवसाय की सफलता में उनके पति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दोनों मिलकर फार्म का संचालन करते हैं और उत्पादन से लेकर बिक्री तक की जिम्मेदारियां साझा करते हैं। स्थानीय बाजार में अंडों की अच्छी मांग होने के कारण उनके उत्पाद आसानी से बिक जाते हैं। इससे परिवार को स्थिर आय का स्रोत प्राप्त हुआ है और आर्थिक सुरक्षा भी बढ़ी है। आय में वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ बच्चों की शिक्षा और परिवार के जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखाई दे रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार आधारित गतिविधियां महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं। मुर्गी पालन, बकरी पालन, अंडा उत्पादन और अन्य छोटे उद्यमों के माध्यम से महिलाएं अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब महिलाओं को सही दिशा, कौशल विकास और आर्थिक सहयोग मिलता है तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में योगदान देती हैं। रेखा बेसरा की सफलता इसी सोच को मजबूत करती है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि संसाधनों और अवसरों का उचित उपयोग करके ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।

आज रेखा बेसरा की कहानी क्षेत्र की अनेक महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। उनकी मेहनत और सफलता यह साबित करती है कि आत्मविश्वास, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग के बल पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकता है। ऐसी कहानियां देशभर में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के बढ़ते कदमों का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आ रही हैं।

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