June 3, 2026

92 करोड़ के फर्जी बिल मामले में ED की कार्रवाई, पूर्व इंजीनियर समेत 3 गिरफ्तार

0
untitled-1780468800

नई दिल्ली। इंदौर नगर निगम के चर्चित फर्जी बिल घोटाले में जांच एजेंसियों को ऐसे कई मामलों के दस्तावेज मिले हैं, जिनमें ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन जमीन पर कार्यों के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले।प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि कुछ परियोजनाएं केवल कागजों में दिखाई गईं, जबकि वास्तविक काम या तो हुआ ही नहीं या फिर भुगतान की तुलना में बहुत कम स्तर पर किया गया।

पूर्व सहायक यंत्री सहित तीन आरोपी गिरफ्तार
जांच के दौरान ईडी ने नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर को कथित मास्टरमाइंड मानते हुए गिरफ्तार किया है। इसके अलावा मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा को भी हिरासत में लिया गया है। तीनों आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया।

92 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी प्रमाण
ईडी का दावा है कि जांच में अब तक लगभग 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ियों के दस्तावेजी प्रमाण सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार सरकारी धन की कथित हेराफेरी से अर्जित रकम का उपयोग मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इसी आधार पर 43 संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की गई है।

अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की भूमिका जांच के दायरे में
जांच एजेंसी का मानना है कि फर्जी बिल तैयार करने और भुगतान स्वीकृत कराने में अधिकारियों, कर्मचारियों तथा ठेकेदारों के बीच मिलीभगत हो सकती है। फिलहाल ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कथित घोटाले से प्राप्त राशि का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों से किया गया।

जांच के प्रमुख बिंदु
92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण सामने आए।
पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार।
विशेष अदालत ने तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर की।
मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में 43 संपत्तियां अटैच की गईं।
फर्जी निर्माण कार्यों और जाली बिलों के जरिए भुगतान लेने के आरोप।
कई अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका जांच के घेरे में।

 पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद
ईडी को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ से धन के प्रवाह, संपत्तियों की खरीद और कथित घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी। हालांकि जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

इंदौर नगर निगम का यह कथित फर्जी बिल घोटाला सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ईडी की कार्रवाई के बाद अब सबकी नजरें जांच के अगले चरण पर टिकी हैं, जहां इस मामले की और परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *