भारतीय जिम कल्चर ने यूक्रेनी इंफ्लूएंसर को किया हैरान, बोलीं- यहां लोग सच में मदद करना चाहते हैं
वीडियो में सैंड्रा ने कहा कि भारत के जिम में प्रवेश करते ही उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे लोग वास्तव में नए सदस्यों का स्वागत करने के लिए उत्साहित रहते हैं। उनके अनुसार भारतीय जिम में लोगों का व्यवहार काफी खुला और मददगार होता है, जबकि यूरोप में अधिकांश लोग अपने वर्कआउट तक सीमित रहते हैं और दूसरों से बहुत कम संवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जिम केवल फिटनेस सेंटर नहीं बल्कि सामाजिक संपर्क और सकारात्मक ऊर्जा का स्थान भी प्रतीत होता है।
सैंड्रा सबसे अधिक भारतीय जिम में मौजूद स्टाफ व्यवस्था को देखकर प्रभावित हुईं। उन्होंने बताया कि यहां सफाई, मेंटेनेंस और सहायता के लिए अलग-अलग लोग मौजूद रहते हैं, जो लगातार इस बात का ध्यान रखते हैं कि जिम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उनके अनुसार यूरोप में इस तरह की सक्रिय सहायता व्यवस्था कम देखने को मिलती है।
उन्होंने भारतीय ट्रेनर्स के व्यवहार को भी काफी अलग और बेहतर अनुभव बताया। सैंड्रा के मुताबिक भारत में ट्रेनर खुद आगे बढ़कर एक्सरसाइज की तकनीक सुधारने और सही तरीके समझाने की कोशिश करते हैं। अगर कोई सदस्य किसी मशीन या एक्सरसाइज को गलत तरीके से कर रहा हो तो ट्रेनर तुरंत मदद के लिए पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में इस तरह की व्यक्तिगत सहायता अक्सर अतिरिक्त शुल्क या पर्सनल ट्रेनिंग पैकेज के तहत मिलती है, जबकि भारत में कई जगह यह सामान्य व्यवहार का हिस्सा दिखाई देता है।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यूरोपीय जिम कुछ मामलों में अधिक संतुलित नजर आते हैं। विशेष रूप से महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी को लेकर उन्होंने कहा कि यूरोप में दोनों की संख्या लगभग बराबर होती है, जबकि भारत के कई जिम में पुरुषों की संख्या अधिक दिखाई देती है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में एक विदेशी महिला होने के कारण उन्हें थोड़ा असहज महसूस हुआ, लेकिन समय के साथ उन्होंने भारतीय माहौल को सहज और सकारात्मक पाया।
सैंड्रा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई भारतीय यूजर्स ने उनके अनुभव से सहमति जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में लोगों की मदद करना और मिलनसार व्यवहार करना सामान्य बात है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हर देश और हर जिम का अनुभव अलग हो सकता है।
फिटनेस संस्कृति के तेजी से विस्तार के बीच यह वीडियो इस बात को भी उजागर करता है कि भारतीय जिम अब केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक जुड़ाव और सामूहिक ऊर्जा का भी हिस्सा बनते जा रहे हैं।
