असम-बंगाल चुनाव परिणाम पर कांग्रेस असमंजस में, शर्मनाक हार के बाद नेतृत्व पर उठे सवाल
नई दिल्ली। हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केरल को छोड़कर असम और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद अब संगठन के भीतर गंभीर मंथन शुरू हो गया है।
असम और पश्चिम बंगाल में मिली हार के बाद पार्टी ने समीक्षा बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन हारों की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी। संगठन के भीतर अभी तक किसी भी स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं हो पाई है, जिससे असंतोष और बढ़ता जा रहा है।
असम में हार के बाद प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पार्टी हाईकमान ने अभी तक उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हार की विस्तृत समीक्षा के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।
असम में हार के बाद प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पार्टी हाईकमान ने अभी तक उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हार की विस्तृत समीक्षा के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में लगातार चुनावी असफलताओं के बावजूद संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारी तय न किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो जमीनी स्तर पर सुधार मुश्किल होगा।
इसी संदर्भ में पार्टी के अंदर चल रहे संगठन सृजन कार्यक्रम पर भी चर्चा हो रही है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में अहमदाबाद अधिवेशन के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करना और जवाबदेही तय करना था, लेकिन अब तक इसका प्रभाव सीमित ही दिखाई दिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पहले भी कहा था कि जिला अध्यक्षों और स्थानीय नेतृत्व को स्थायी पद नहीं माना जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर ही उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था का प्रभाव अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो सका है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पहले भी कहा था कि जिला अध्यक्षों और स्थानीय नेतृत्व को स्थायी पद नहीं माना जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर ही उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था का प्रभाव अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो सका है।
इसी बीच, आगामी 2027 के चुनावों को देखते हुए पार्टी पर प्रदर्शन सुधारने का दबाव बढ़ रहा है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन को पुनर्गठित किए बिना चुनावी स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
वहीं दूसरी ओर, केरल में पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिली सफलता के बाद वहां सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल प्रमुख बताए जा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, केरल में पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिली सफलता के बाद वहां सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल प्रमुख बताए जा रहे हैं।
हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अभी अंतिम फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि संगठन में निर्णय प्रक्रिया अब भी केंद्रीकृत बनी हुई है।
कुल मिलाकर, असम और बंगाल में हार के बाद कांग्रेस एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां समीक्षा तो शुरू हो चुकी है, लेकिन जवाबदेही तय करने और संगठन में वास्तविक सुधार की दिशा अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
