May 1, 2026

12 सदस्यीय भारतीय शॉटगन स्क्वॉड तैयार, वर्ल्ड कप स्टेज में दिखेगा निशानेबाजों का जलवा

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नई दिल्ली।

भारतीय शॉटगन निशानेबाजी टीम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता दिखाने के लिए तैयार है। 12 सदस्यों वाली यह टीम कजाकिस्तान के अल्माटी में आयोजित होने वाले ISSF वर्ल्ड कप स्टेज में हिस्सा लेने जा रही है। इस प्रतियोगिता को इस साल की सबसे अहम शूटिंग स्पर्धाओं में से एक माना जा रहा है, जिसमें दुनिया भर के शीर्ष निशानेबाज अपनी सटीकता और कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

यह प्रतियोगिता 2 मई से 11 मई 2026 तक आयोजित की जाएगी और इसमें पांच ओलंपिक इवेंट्स शामिल होंगे। कुल मिलाकर 40 से अधिक देशों के लगभग 284 खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित आयोजन में भाग ले रहे हैं। भारतीय दल के कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो रैंकिंग पॉइंट्स के आधार पर मुकाबला करेंगे और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को और मजबूत बनाएंगे।

प्रतियोगिता की शुरुआत पुरुष और महिला स्कीट इवेंट्स से होगी, जिनके क्वालिफिकेशन राउंड पहले दिन खेले जाएंगे। इसके अगले ही दिन फाइनल मुकाबले निर्धारित हैं, जबकि ट्रैप इवेंट्स बाद में आयोजित किए जाएंगे। मिश्रित टीम ट्रैप का फाइनल इस स्पर्धा का अंतिम मुकाबला होगा, जिससे पूरे आयोजन का समापन होगा।

भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी खास है क्योंकि कई अनुभवी खिलाड़ी इस सीजन में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतरेंगे। टीम में शामिल प्रमुख निशानेबाजों से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने प्रदर्शन से पदक की दौड़ में मजबूत स्थिति बनाएंगे। खिलाड़ियों ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है।

इस बार भारतीय निशानेबाजों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। इटली, चीन, रूस, फिनलैंड, डेनमार्क और अन्य कई देशों के शीर्ष खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मेजबान कजाकिस्तान की टीम भी मजबूत मानी जा रही है, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक हो जाएगा। हर इवेंट में कड़ा संघर्ष देखने की संभावना है और छोटे अंतर से परिणाम तय हो सकते हैं।

भारतीय शॉटगन टीम का हालिया प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रभावशाली रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निशानेबाजों ने लगातार पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। इसी वजह से इस प्रतियोगिता में भी उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

कोचिंग स्टाफ और टीम प्रबंधन का मानना है कि खिलाड़ियों ने तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी है और वे मानसिक तथा तकनीकी दोनों स्तर पर पूरी तरह तैयार हैं। अब नजर इस बात पर है कि यह टीम दबाव भरे मुकाबलों में कितना स्थिर प्रदर्शन कर पाती है।

अल्माटी का यह मंच भारतीय निशानेबाजों के लिए न केवल एक चुनौती है, बल्कि खुद को वैश्विक स्तर पर और मजबूत साबित करने का सुनहरा अवसर भी है।

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