April 24, 2026

अनिश्चितता के दौर में गोल्ड ETF बना सुरक्षित विकल्प, AUM पहुंचा 1.7 लाख करोड़

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नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर सोने पर मजबूत होता दिख रहा है। खासतौर पर डिजिटल निवेश के रूप में Gold ETF ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। मार्च 2026 में गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹1,71,468 करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर लगभग तीन गुना उछाल को दर्शाता है।
पांच साल में धमाकेदार ग्रोथ

ICRA Analytics की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड ETF ने पिछले पांच वर्षों में करीब 64.76% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है। मार्च 2021 में जहां AUM सिर्फ ₹14,122 करोड़ था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है।

सिर्फ एक साल में ही AUM ₹58,887 करोड़ (मार्च 2025) से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया—यानी करीब 191% की जोरदार बढ़ोतरी।
 इनफ्लो भी मजबूत, लेकिन मासिक आधार पर गिरावट

मार्च 2026 में गोल्ड ETF में ₹2,265 करोड़ का शुद्ध निवेश (इनफ्लो) आया, जबकि पिछले साल इसी महीने ₹77 करोड़ की निकासी हुई थी। हालांकि फरवरी 2026 के ₹5,254 करोड़ के मुकाबले मार्च में इनफ्लो करीब 56% घटा है।

इस गिरावट की वजह सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी और वैश्विक जोखिम में अस्थायी कमी मानी जा रही है।
 क्यों बढ़ रहा है गोल्ड ETF में निवेश?

विशेषज्ञों के अनुसार, दो बड़े कारण इस उछाल के पीछे हैं—
वैश्विक अनिश्चितता और तनाव
सोने की लगातार मजबूत कीमतें
इन हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्प की तलाश में रहते हैं और सोना पारंपरिक रूप से “सेफ हेवन” माना जाता है। इसलिए Gold ETF तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
 पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का पसंदीदा विकल्प

फिलहाल बाजार में 26 गोल्ड ETF स्कीम उपलब्ध हैं, जिनमें से 6 नई स्कीम वित्त वर्ष 2025-26 में लॉन्च हुई हैं।

इन फंड्स ने पिछले एक साल में करीब 58% से 62% तक का रिटर्न दिया है, जबकि 5 साल का CAGR रिटर्न लगभग 26% के आसपास रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि गोल्ड ETF निवेश पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और लॉन्ग टर्म रिटर्न के लिए बेहतर विकल्प है, जबकि फिजिकल गोल्ड अधिकतर पारंपरिक उपयोग के लिए खरीदा जाता है।

 गिरावट के बावजूद भरोसा कायम

हालांकि हाल के महीनों में इनफ्लो में थोड़ी कमी आई है, लेकिन निवेश पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा अब भी इस एसेट क्लास पर कायम है और आगे भी इसमें स्थिर ग्रोथ की संभावना बनी हुई है।

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