May 13, 2026

BJP Uttarakhand: भाजपा की आत्ममुग्धता न बन जाए उत्तराखंड में हार का कारण

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Surest Bhatt with pm modi
  • सुरेश भट्ट : संगठन में खास अनुभव रखने वाले नेता को तक सीमित भूमिका में रख रही भाजपा

भाजपा का उत्तराखंड चुनाव 2027 को लेकर अतिआत्मविश्वास उसे कहीं न कहीं भारी चोट दिलवा सकता है। एक ओर जहां उत्तराखंड की मजबूती को लेकर काफी हद तक शिथिल बनी हुई है। जिसके चलते अबतक प्रदेश संगठन के सदस्यों की सूची को तक जारी नहीं किया गया है। जानकारों का यहां तक मानना है कि भाजपा संगठन वर्तमान में कई योग्य नेताओं व कार्यकर्ताओं का उनकी क्षमताओं के अनुसार उपयोग नहीं कर रहा है। इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण उदाहरण सुरेश भट्ट हैं। जिन्हें संगठन का अच्छा खासा अनुभव होने के बावजूद उत्तराखंड में एक छोटे व सीमित रोल में रखा गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन में उनके लंबे अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए वे राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक स्तर पर किसी बड़ी जिम्मेदारी के योग्य हैं। वहीं उनके समर्थक तो उन्हें सीएम पद के लिए उत्तराखंड में सबसे उपयुक्त विकल्प मानते हैं।

संगठन को काफी करीब से जानने वाले जानकारों के अलावा भट्ट के साथ जुड़े रह चुके लोगों का भी मानना है कि, राज्य स्तर पर उनकी जमीनी पकड़ उतनी मजबूत नहीं दिखती, लेकिन संगठनात्मक कार्यों में उनकी दक्षता उन्हें बड़े पदों के लिए उपयुक्त बनाती है। ऐसे में यदि उन्हें दिल्ली में संगठन के मुख्यालय में कुछ वर्षों तक काम करने का अवसर दिया जाए, तो वे पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राजनीति के जानकारों के अनुसार भी संगठन के साथ इस तरह की खिलवाड़ भाजपा की आत्ममुग्धता का प्रमाण दिखता है, जिसका परिणाम भारी पड़ सकता है। ऐसे में जहां कई स्थानों पर राज्य की जनता तक का मान रही है कि इन दिनों भाजपा के कार्यकर्ताओं की उन तक पहुंच में काफी गिरावट आई है। जिसके चलते इस बार भाजपा को प्रदेश में कड़ी टक्कर से गुजरना पड़ सकता है।

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कौन हैं सुरेश भट्ट : जीवन परिचय और राजनीतिक सफर
जन्म: 6 सितंबर 1968, नैनीताल जिले के झलुवा झाला (कालाढूंगी)

शिक्षा: कुमाऊँ विश्वविद्यालय से बीए, एमए और विधि स्नातक

छात्र राजनीति: 1986 में ABVP से जुड़ाव, 1992 में छात्रसंघ अध्यक्ष

संगठन में भूमिका: 1993 से पूर्णकालिक प्रचारक, 2006-2008 तक ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री

भाजपा में योगदान: 2011 से हरियाणा में संगठन महामंत्री, 2014 और 2019 की जीत में अहम भूमिका

उत्तराखंड में वापसी: 2020 में प्रदेश महामंत्री नियुक्त, संगठन में रणनीतिक सोच और अनुभव के कारण प्रमुख चेहरा बने।

 

Expert thinks: BJP’s self-complacency will sure become the reason for defeat in Uttarakhand 2027

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