मध्यप्रदेश: बढ़ती गर्मी में स्कूल सत्र टालने की मांग, कांग्रेस का दावा – बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा
पूर्व प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने स्कूल शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर तुरंत निर्णय लेने का आग्रह किया। उनका कहना है कि कई निजी स्कूल फीस के लालच में जल्दी सत्र शुरू कर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
मुख्य बातें:
गर्मी का असर: मार्च से तापमान तेजी से बढ़ रहा है। अप्रैल और मई में लू और भीषण गर्म हवाओं का असर और बढ़ सकता है।
निजी स्कूलों पर आरोप: कई स्कूल फीस वसूली के लिए छोटे बच्चों को मार्च, अप्रैल या जून में ही बुला लेते हैं।
बुनियादी सुविधाओं की कमी: कई स्कूलों में शीतल पेयजल, पंखे, कूलर और वेंटिलेशन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
स्वास्थ्य जोखिम: तेज गर्मी से बच्चों में डिहाइड्रेशन, लू लगना, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
सरकार से पांच प्रमुख मांगें:
अप्रैल में शुरू होने वाले सत्र को गर्मी कम होने तक स्थगित किया जाए।
यदि सत्र शुरू करना जरूरी हो तो स्कूलों का समय सुबह जल्दी रखा जाए।
सभी स्कूलों में शीतल पेयजल, प्राथमिक उपचार और गर्मी से बचाव के निर्देश लागू हों।
जिला प्रशासन इस मामले में विशेष निगरानी करे।
निजी स्कूलों द्वारा मनमानी पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
त्रिपाठी ने कहा, “बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया से ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।”
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