March 10, 2026

खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार

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नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुर गांव में तीन दिन का अनौपचारिक शोक मनाया गया। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य और उनके 40 से अधिक अधिकारी मारे गए। इस घटना के बाद ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए।

मिनी ईरान में शोक की लहर

अलीपुर जिसे लंबे समय से मिनी ईरान कहा जाता है शिया मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। रविवार को खामेनेई की मृत्यु की खबर की पुष्टि होते ही पूरा गांव थम गया। स्थानीय निवासियों ने स्वेच्छा से तीन दिन के लिए दुकानें और व्यवसाय बंद रखे। सुबह से ही सड़क किनारे ठेले और बाजार बंद रहे लोग समूहों में इकट्ठा हुए और खामेनेई के चित्र के साथ धार्मिक नारे लगाए।

विरोध जुलूस और शोक प्रदर्शन

दो दिन के शोक के बाद अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में विरोध जुलूस निकाला गया। लगभग पूरे गांव ने इसमें भाग लिया। कई लोग काले वस्त्र पहनकर खामेनेई के प्रति सम्मान और शोक व्यक्त कर रहे थे।

ईरान से ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संबंध

अलीपुर गांव का ईरान से जुड़ाव केवल धार्मिक नहीं बल्कि शैक्षिक और व्यापारिक भी रहा है। गांव का मूल नाम बेल्लिकुंटे था। बीजापुर आदिलशाहियों के समय शिया मुस्लिमों का एक समूह यहां बस गया और इसे अलीपुर नाम दिया गया। अधिकांश निवासी आज भी व्यापार और शिक्षा के लिए ईरान और अरब देशों से जुड़े हैं।

खामेनेई का इस गांव से व्यक्तिगत संबंध 1986 से जुड़ा है जब वह ईरान के राष्ट्रपति के रूप में अलीपुर आए और एक स्थानीय अस्पताल का उद्घाटन किया। स्थानीय निवासी शफीक ने बताया उनका दौरा हमारे आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने वाला था। हमारा जुड़ाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक मार्गदर्शन से भी जुड़ा है।

स्थानीय धर्मगुरुओं का बयान

गांव के धर्मगुरु मौलाना सैयद इब्राहिम ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमला बिना उकसावे के और अत्यंत निंदनीय था। उनका कहना था कि दुर्भाग्य है कि कई इस्लामी देश इस हमले पर मूक दर्शक बने हुए हैं।

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