March 8, 2026

पाकिस्‍तान को इजरायल की दो टूक; गाजा पट्टी में मुनीर के मंसूबों पर फेरा पानी

0
munir-1768030693
नई दिल्‍ली। इजरायल ने दो टूक कहा है कि गाजा में अमेरिका के प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबलाइज़ेशन फोर्स (ISF) में पाकिस्तानी सेना को एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही इजरायल ने कहा है कि हमास के साथ उसके संबंधों की वजह से उसकी गाजा में भागीदारी संदिग्ध है।
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल अमेरिका द्वारा प्रस्तावित किसी भी गाजा स्थिरीकरण बल में पाकिस्तानी सेना को शामिल करने का स्पष्ट रूप से विरोध करता है। उन्होंने कहा कि हमास और आतंकी संगठनों के रिश्तों के कारण पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते।

एक विशेष साक्षात्कार में अज़ार ने कहा कि हमास और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, खासकर लश्कर-ए-तैयबा, के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर इज़रायल को गहरी चिंता है। इजरायल की तरफ से यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब पाकिस्तान गाजा में इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने पर अमेरिका की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार ही कर रहा है।

बता दें कि ट्रंप के गाजा में शांति बहाली और सत्ता हस्तांतरण के फार्मूले के तहत वहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तिरिकरण बल की तैनाती की जानी है, जिसमें कई देश शामिल होंगे। पाकिस्तान ने भी इस बल में शामिल होने की इच्छा जताई थी लेकिन इजरायल ने उसे खारिज कर दिया है।

हमास के खात्मे के बिना कोई व्यवस्था संभव नहीं
इजरायली राजदूत अज़ार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में पूरी तरह खत्म किए बिना गाज़ा के भविष्य को लेकर कोई भी व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में एक स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) का विचार तब तक निरर्थक है, जब तक हमास को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता। यह पहली बार है जब इजरायल आधिकारिक तौर पर और खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना की भूमिका के खिलाफ सामने आया है।

यह आसिम मुनीर के लिए बड़ा झटका है, जो गाजा में अपनी सेना की तैनाती के बड़े ख्वाव देख रहे थे।
पाक समेत कई देशों से अमेरिका ने किया था संपर्क
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने गाज़ा में सुरक्षा और पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित बल में योगदान देने को लेकर पाकिस्तान समेत कई देशों से संपर्क किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अज़ार ने कहा, “कई देशों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे हमास से लड़ने के लिए अपने सैनिक नहीं भेजना चाहते। ऐसे में यह योजना व्यावहारिक नहीं लगती।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या इज़रायल गाज़ा में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी को स्वीकार करेगा, तो उनका जवाब साफ था “नहीं।”
“केवल उन्हीं के साथ काम करेंगे जो भरोसेमंद”
पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए इज़रायली राजदूत ने कहा,“देश आमतौर पर उन्हीं के साथ सहयोग करते हैं जिनके साथ उनके भरोसेमंद राजनयिक संबंध हों। इस समय पाकिस्तान के साथ ऐसी स्थिति नहीं है।” इस बयान से इज़रायल की पाकिस्तान को लेकर गहरी अविश्वास की भावना साफ झलकती है।
हमास–पाकिस्तान संपर्कों पर इजरायल की नजर
राजदूत अज़ार के बयान ऐसे समय आए हैं जब हाल ही में यह बात सामने आई है कि हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी ज़हीर पिछले तीन वर्षों से लगातार पाकिस्तान की यात्राएं कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, नाजी ज़हीर ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से कई बैठकें और मुलाकातें की थीं। ये बैठकें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)में भी हुईं हैं। यह बात भी सामने आ चुकी है कि 7 अक्टूबर को इज़रायल पर हुए हमले के कुछ ही दिनों बाद ज़हीर पेशावर में मौजूद था।अज़ार ने पुष्टि की कि इज़रायली खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *