March 8, 2026

अब कुपोषण दूर करेगा 35 फीसदी अधिक लौहयुक्त शिटाके मशरूम

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Masrum-final

– पंत विवि के वैज्ञानिकों ने आयरन नैनोकणों से शिटाके मशरूम का बायोफोर्टिफिकेशन कर हासिल की उपलब्धि

पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आयरन नैनोकणों से शिटाके मशरूम का बायोफोर्टिफिकेशन कर 35 फीसदी अधिक लौहयुक्त शिटाके मशरूम तैयार करने में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस नैनो तकनीक से मशरूम ऊतकों में आयरन का अवशोषण, संचलन और जैव उपलब्धता काफी बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का पेटेंट भी फाइल कर दिया है।

सीबीएसएच कालेज के पूर्व अधिष्ठाता और वैज्ञानिक डाॅ. संदीप अरोड़ा ने बताया कि शिटाके मशरूम (लेंटिनुला इडाॅडस) विश्व का सबसे मूल्यवान खाद्य और औषधीय कवक है। पूर्वी एशिया के जंगलों, विशेषकर जापान और चीन, में उत्पन्न इस मशरूम की खेती जगभग एक हजार वर्ष पुरानी है। जब इसे पारंपरिक रूप से ओक की लकड़ियों पर उगाया और स्वास्थ्य लाभ के कारण ’जीवन अमृत’ के रूप में जाना जाता था। जबकि भारत जैसे राष्ट्र तकनीकी नवाचार और वैल्यू एडिशन रणनीतियों से इसके उत्पादन का विस्तार कर रहे हैं। आज शिटाके विश्व का दूसरा सबसे अधिक उत्पादित मशरूम है, जो न केवल अपने समृद्ध स्वाद, बल्कि अपने उच्च पोषण के लिए जाना जाता है। जैसे-जैसे वैश्विक खाद्य प्रणाली बदल रही है, नैनो-बायोफोर्टिफाइड मशरूम आयरन की कमी से निपटने में टिकाऊ, सुलभ और अधिक प्रभावी समाधान बन सकते हैं। कभी प्राचीन परंपराओं में पूजनीय शिटाके मशरूम अब छुपी भूख के विरुद्ध एक आधुनिक हथियार बनकर उभर रहा है। जहां विज्ञान, पोषण और नवाचार एक ही थाली में मिलते हैं।

लगभग दो अरब लोग पोषक तत्वों की कमी से प्रभावित
डाॅ. अरोड़ा ने बताया कि विश्व आज भी छुपी भूख का सामना कर रहा है। जिसके चलते दो अरब से अधिक लोग सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से प्रभावित हैं। इनमें सबसे अधिक लौह तत्व की कमी है। जिसके परिणामस्वरूप एनीमिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और विकास संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिक मशरूम को पोषण संवर्धन के लिए नए विकल्प के रूप में देखते हैं।

शिटाके में उपलब्ध हैं यह तत्व
पंतनगर। इसमें आवश्यक अमीनो अम्ल, आहार फाइबर, विटामिन-बी, खनिज व लेंटिनान और एरिटाडेनिन जैसे विशिष्ट जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। यह तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, कैंसर-रोधी, सूजन-रोधी और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने जैसे स्वास्थ्य लाभों से जुड़े हैं। पोषण और औषधीय ’सुपरफूड’ के रूप में इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने इसे वैश्विक बाजार में बहु-अरब डॉलर की वस्तु बना दिया है। जहां खाद्य व फार्मा उद्योगों में इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।

शोध में इन वैज्ञानिकों ने हासिल की उपलब्धि
पंतनगर। यह महत्वपूर्ण शोधकार्य मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एवं जेनेटिक इंजीनियरिंग विभाग में डाॅ. अरुणा परिहार ने डॉ. संदीप अरोड़ा और डॉ. केपीएस कुशवाहा के मार्गदर्शन में किया है। अनुकूलित नैनो-बायोफोर्टिफिकेशन तकनीक से उन्होंने शिटाके में लौह की मात्रा को लगभग 35 फीसदी तक बढ़ाने में सफलता हासिल की है, वह भी बिना किसी विषाक्त प्रभाव या गुणवत्ता में कमी के। यह नैनो स्तर के कण माइसीलियम के साथ प्रभावी रूप से अंतःक्रिया कर पोषक तत्व अवशोषण मार्गों को मजबूत करते हैं।

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