– दिवाली, जिसे प्रकाश का त्योहार भी कहा जाता है, भारत में एक महत्वपूर्ण उत्सव है जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। लोग एक साथ मिलकर दीये जलाते हैं, घरों को सजाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। द्रिक पंचांग शुभ अमावस्या, अमावस्या, जिसे लक्ष्मी पूजा भी कहा जाता है, पर प्रकाश डालता है।
Diwali 2025: इस बार भी दीपोत्सव का पर्व पांच के बजाय छह दिनों का होगा। यह लगातार चौथा साल है जब दीपोत्सव छह दिन का होगा। इस बार भी अमावस्या तिथि दो दिन रहेगी। अमावस्या 20 अक्टूबर दोपहर बाद आएगी और 21 अक्टूबर की शाम तक रहेगी। ऐसे में लक्ष्मी पूजा 20 अक्टूबर को होगी, जबकि अगले दिन स्नानदान अमावस्या होगी। इसी प्रकार लक्ष्मी पूजन के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा और तीसरे दिन भाई दूज मनेगी।
लगातार चौथे साल ऐसी स्थिति: दिवाली पर यह लगातार चौथा साल है जब दीपोत्सव पांच की जगह छह दिनों का हो रहा है। पिछले साल भी अमावस्या तिथि दो दिन थी। इसी प्रकार 2023 में भी अमावस्या तिथि दो दिन थी और दिवाली के अगले दिन सोमवती अमावस्या, स्नानदान अमावस्या थी। 2022 में दिवाली के अगले दिन सूर्यग्रहण होने के कारण भी भाईदूज तीसरे दिन मनाई गई थी।
दीपोत्सव में कब क्या
● 18 अक्टूबर धनतेरस
● 19 अक्टूबर नरक चतुर्दर्शी
● 20 अक्टूबर दिवाली, लक्ष्मीपूजा
● 21 अक्टूबर स्नानदान अमावस्या
● 22 अक्टूबर गोवर्धन पूजा
● 23 अक्टूबर भाई दूज
दूसरे दिन शाम तक रहेगी अमावस्या
अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर सोमवार को दोपहर से आएगी और 21 अक्टूबर मंगलवार शाम तक रहेगी। पंडितों का कहना है कि मां महालक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल, महानिशा काल में की जाती है।
पंडित व ज्योतिष के जानकार एसके उपाध्याय का कहना है कि हिंदू पंचांग, कैलेंडर के हिसाब से कई बार एक तिथि दो दिन तक रहती है, इसलिए ऐसी स्थिति बनती है। इस बार अमावस्या भी 20 अक्टूबर दोपहर 3 बजकर 52 मिनट पर आएगी और 21 अक्टूबर शाम 5:59 तक रहेगी।