# योग सूत्र: यह आत्मा को चैतन्य बनाता है
@डॉ.आशीष द्विवेदी की कलम से…

नमस्कार,
आज बात योग की…
यह आत्मा को चैतन्य बनाता है
हमारे शरीर के अलग-अलग क्षेत्र हैं। प्रत्येक के विकास का क्रम और तरीके भी पृथक हैं। हम मस्तिष्क को चैतन्य बनाने के लिए पठन-पाठन और स्वाध्याय करते हैं। शरीर को बलिष्ठ बनाने के लिए हम व्यायाम करते हैं। किंतु हमारे भीतर विराजमान सबसे अहम तत्व आत्मा को चैतन्य बनाने क्या करते हैं? कभी आपने इस ढंग से भी सोचने का प्रयास किया है। इसका उत्तर है – योग और ध्यान ! जब हम शरीर को योग हेतु समर्पित करते हैं तो एक तरह से हम उस परमात्मा से एकाकार होने की दिशा में ही तो बढ़ रहे होते हैं। अपने ब्रम्हांड रुपी शरीर की अनंत शक्ति और ऊर्जा को स्व कल्याण के लिए अर्पित करना।
डॉ.आशीष द्विवेदी से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें : डॉ.आशीष द्विवेदी
जब हम योग से जुड़ते हैं तो हमारी समस्त इंद्रियां संयमित होने लगती है। मन का विचलन भी शनै-शनै समाप्त होने लगता है। आप योग साधक हैं तो एक तरह से इंद्रिय साधक भी हैं। योग आपको बहुतेरे व्यसनों से भी मुक्त रखता है। आपके मनोबल को पुष्ट रखता है। आप देखिए योग के ज्यादातर आसन प्रकृति से ही तो लिए गए हैं। गुरु शिष्य परंपरा में जो शक्तिपात दीक्षा का विधान है, उसके अनुसार गुरु अपनी शक्ति से कुंडलिनी को चेतन करके ऊपर ले जाते हैं। गुरु का इस शक्ति पर पूर्ण प्रभुत्व होता है, इसलिए वह गुरु के आदेशानुसार चलती है। कुंडलिनी को जाग्रत किए बगैर मनुष्य का व्यवहार पशुवत रहता है। और कुंडलिनी जागरण का माध्यम योग ही तो है।
योग और ध्यान दोनों मन और आत्मा के व्यायाम हैं। शरीर की क्षमता कितनी भी हो किंतु यदि मन रुग्ण होगा तो कुछ भी उल्लेखनीय किया नहीं जा सकता। योग हमारे मन का टाॅनिक है। हमारी मेधा को प्रखर कर उसे प्रज्ञावान बनाता है। हम सभी जानते हैं कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है किंतु उससे बड़ा सत्य है कि जिसका मन स्वस्थ है उसका शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहने वाला है। यह परस्परता है। इसलिए यथासंभव शरीर के साथ अपनी चेतना को भी जाग्रत करने का समय दीजिए। योग इसके लिए रामबाण है। इतना सहज, सरल उपाय दूसरा कोई और नहीं जिसमें आपकी कौड़ी भर नहीं लगना किंतु परिणाम चमत्कारिक हैं।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की आप सभी को मंगलकामनाएं!
शुभ मंगल
# योग सूत्र
