March 9, 2026

छह भाजपा शासित राज्य नए वक्फ कानून का समर्थन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

0
waqf

नई दिल्ली, वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को लोकसभा में 288 में से 232 वोटों के समर्थन और राज्यसभा में 128 वोटों के समर्थन और 95 वोटों के विरोध के साथ पारित किया गया था।

वक्फ कानून के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भाजपा शासित 6 राज्य, आज होनी है सुनवाई
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। छह भाजपा शासित राज्यों (हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और असम) ने इस अधिनियम के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। इन राज्यों ने अपने हलफनामों में तर्क दिया है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इसके साथ ही, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने भी इस कानून के समर्थन में हस्तक्षेप याचिका दायर की है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ आज दोपहर 2 बजे इस मामले की सुनवाई करेगी। पीठ में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन शामिल हैं। इस पीठ के समक्ष कुल 73 याचिकाएं सूचीबद्ध हैं, जिनमें से अधिकांश इस अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती दे रही हैं। इन याचिकाओं में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, इमरान प्रतापगढ़ी, आप विधायक अमानतुल्लाह खान, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके जैसी प्रमुख हस्तियों और संगठनों की याचिकाएं शामिल हैं।

हरियाणा सरकार की दलील
हरियाणा ने कहा है कि अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को एकीकृत और पारदर्शी बनाना है। अधिनियम अधूरी वक्फ सर्वे प्रक्रिया, त्रुटिपूर्ण लेखा व्यवस्था, वक्फ बोर्डों और न्यायाधिकरणों में लंबित मुकदमों की अधिकता, संपत्तियों की म्युटेशन की कमी, तथा मुतवल्लियों द्वारा की जाने वाली ऑडिटिंग की खामियों को दूर करने का प्रयास करता है।

महाराष्ट्र की दलील
महाराष्ट्र ने अदालत को बताया है कि उसे संसद में अधिनियम पर हुई चर्चाओं, राज्यों से मिली जमीनी जानकारी, भारत में धार्मिक न्यासों के कानूनों की तुलना, और वक्फ प्रबंधन में अपारदर्शिता एवं दुरुपयोग से संबंधित आंकड़ों को प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने कहा कि वह इन पहलुओं पर न्यायालय की सहायता करना चाहती है।

मध्यप्रदेश की दलील
मध्यप्रदेश ने कहा है कि संशोधित अधिनियम का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर शासन सुनिश्चित करना है। यह अधिनियम कानूनी रूप से मजबूत, तकनीक-आधारित और सुव्यवस्थित व्यवस्था प्रदान करता है, जिससे लाभार्थियों का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।

राजस्थान की दलील
राजस्थान ने अपने आवेदन में कहा है कि अतीत में कई बार निजी या राज्य की संपत्तियों को बिना सूचना के वक्फ घोषित कर दिया गया था। नए संशोधन में यह प्रावधान किया गया है कि किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने से पहले दो प्रमुख समाचार पत्रों में 90 दिनों की सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की जाएगी, ताकि सभी पक्षकारों को आपत्ति दर्ज करने का अवसर मिल सके। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और मनमानी घोषणाओं पर रोक लगेगी।

छत्तीसगढ़ की दलील
छत्तीसगढ़ सरकार ने बताया कि संशोधन से वक्फ बोर्ड और स्थानीय प्राधिकरणों के बीच समन्वय बेहतर होगा। एक डिजिटल पोर्टल की व्यवस्था की गई है जिससे वक्फ संपत्तियों की ट्रैकिंग, पहचान और निगरानी में पारदर्शिता और सख्ती सुनिश्चित की जा सके।

असम की दलील
असम ने अपनी याचिका में कहा कि संशोधित अधिनियम की धारा 3E के अनुसार अनुसूचित या आदिवासी क्षेत्रों (पांचवीं और छठी अनुसूचियों में शामिल) में किसी भी भूमि को वक्फ घोषित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। असम सरकार ने कहा कि राज्य के 35 जिलों में से 8 जिले छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला सीधे इन क्षेत्रों को प्रभावित करेगा।

इन सभी राज्यों ने कोर्ट से आग्रह किया है कि उन्हें इस मामले में पक्षकार बनने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अधिनियम की संवैधानिक वैधता के समर्थन में अपना पक्ष रख सकें और इस पर व्यापक रूप से विचार किया जा सके।

वक्फ बोर्ड का समर्थन
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने भी इस कानून के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। बोर्ड ने तर्क दिया कि यह संशोधन दशकों से प्रभावशाली और धनी मुस्लिमों द्वारा वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण को खत्म करेगा। बोर्ड ने कहा कि यह कानून वक्फ संपत्तियों को गरीब और वंचित मुस्लिम समुदाय के लाभ के लिए उपयोग में लाएगा।

पश्चिम बंगाल में हिंसा
वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर पश्चिम बंगाल में व्यापक विरोध और हिंसा की खबरें सामने आई हैं। मुरशिदाबाद और दक्षिण 24 परगना के भांगर क्षेत्र में हुए हिंसक प्रदर्शनों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कानून को लागू करने से इनकार कर दिया है और इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने ममता बनर्जी पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।

बता दें कि वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को लोकसभा में 288 में से 232 वोटों के समर्थन और राज्यसभा में 128 वोटों के समर्थन और 95 वोटों के विरोध के साथ पारित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को इस विधेयक को अपनी मंजूरी दी, जिसके बाद यह कानून बन गया। इस कानून में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, सर्वेक्षण, पंजीकरण और कानूनी प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *