धीरेंद्र शास्त्री पर फिर भड़के दामोदर यादव, बोले- 90 प्रतिशत सुधार हुआ अब 10 प्रतिशत बाकी, आश्रम पर ताला लगाने की चेतावनी
दामोदर यादव के मुताबिक वे पिछले करीब एक साल से धीरेंद्र शास्त्री के बयानों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद अब देशभर में यादव समाज के लोग भी विरोध जता रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके साथियों को भी अब समझ में आ रहा है कि वे पहले से ही इस मुद्दे पर आवाज उठाते रहे हैं। यादव ने कहा कि केवल गोलमोल तरीके से माफी मांगने से विवाद खत्म नहीं होगा। उनकी मांग है कि धीरेंद्र शास्त्री की कथाओं पर प्रतिबंध लगाया जाए और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच की जाए। इसके अलावा आश्रम के आसपास सामने आई शिकायतों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
दामोदर यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तक उनका स्पष्ट संदेश पहुंच चुका है कि धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि मुख्यमंत्री इसका इलाज कर दें नहीं तो यादव समाज खुद कार्रवाई के लिए आगे आएगा। यादव ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब वे स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं तो इस विवाद में सख्त निर्णय क्यों नहीं लेते। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्रवाई नहीं होती है तो वे अपने साथियों के साथ धीरेंद्र शास्त्री के आश्रम पहुंचकर ताला लगाने का कदम उठा सकते हैं।
दामोदर यादव ने उत्तर प्रदेश के कुंडा से जुड़े राजा भैया को भी इस विवाद में घसीटा है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि राजा भैया 17 से 20 नवंबर तक धीरेंद्र शास्त्री की कथा आयोजित करा रहे हैं। यादव ने सवाल उठाया कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम को लेकर उठे विवाद के बावजूद कथा आयोजित करना क्या उचित है। उन्होंने राजा भैया से पूछा कि क्या उन्हें भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी स्वीकार है। यादव ने कहा कि यदि इसके बाद भी कथा कराई जाती है तो वे इसे धार्मिक भावनाओं की अनदेखी के रूप में देखेंगे।
अपने बयान में दामोदर यादव ने कहा कि वे डीएनए से भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं और विचारों से अंबेडकरवादी तथा संविधानवादी हैं। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार मिला है। यादव ने देशभर के यादव समाज और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन की तारीख और आगे की रणनीति जल्द घोषित की जाएगी।
दरअसल विवाद की शुरुआत 29 अक्टूबर 2026 को मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी से हुई थी। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की खड़े होने की मुद्राओं की तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि भगवान राम सीधे खड़े होते हैं जबकि भगवान श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं। इस दौरान उन्होंने कृष्ण की त्रिभंग मुद्रा और बांसुरी के साथ भगवान राम के धनुष तथा अयोध्या का उल्लेख किया था। वीडियो वायरल होने के बाद ब्रज क्षेत्र के संतों और कृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई थी।
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका भगवान राम और भगवान कृष्ण में भेद करने या किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था। उन्होंने भावनाएं आहत होने पर माफी भी मांगी थी। इसके अलावा भगवान राम के पांच पिता होने संबंधी उनका एक पुराना वीडियो भी चर्चा में आया। अब दामोदर यादव की चेतावनी और कथाओं पर प्रतिबंध की मांग के बाद यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।
