केदारताल हादसा: केदारताल ट्रेक पर बढ़ते हादसों के बाद प्रशासन एसओपी बदलेगा
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दो वर्ष पहले ही तैयार की गई थी ट्रैकिंग व पर्वतारोहण एसओपी
केदारताल ट्रैक पर हादसे के बाद अब प्रशासन की ओर से ट्रैकिंग व पर्वतारोहण संबंधित एसओपी में बदलाव करने की बात की जा रही है। जबकि सहस्त्रताल ट्रैक पर वर्ष 2024 में हुए हादसे के बाद दो वर्ष पूर्व ही जिला प्रशासन की ओर से कमेटी गठित कर एसओपी तैयार की गई थी। लेकिन जनपद के ट्रैकिंग रूटों पर लगातार बढ़ रहे हादसे एसओपी के पालन को लेकर सवाल खड़ा कर रही है।
जनपद के विभिन्न ट्रैक रूटों पर ट्रेकिंग व पर्वतारोहण के दौरान हिमस्खलन और अन्य घटनाओें में वर्ष 2021 से अब तक 53 से अधिक ट्रैकर्स अपनी जान गंवा चुके हैं। जबकि उससे पूर्व भी कई घटनाओं में ट्रैकर्स व पर्वतारोही जान गंवा चुके हैं। वर्ष 2024 में सहस्त्रताल ट्रैक पर नौ ट्रैकर्स की बर्फीले तूफान में फंसने व तबीयत खराब होने के बाद मौत हो गई थी। उसके बाद जिलाधिकारी की ओर से नौ सदस्यीय कमेटी गठित कर ट्रैकिंग व पर्वतारोहण के लिए एसओपी बनाई गई थी।
इसमें हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों में सेटेलाइट फोन की अनिवार्यता के साथ ही गाइड का ट्रैकिंग व पर्वतारोहण में प्रशिक्षण सर्टिफिकेट सहित अनुभव आदि के नियम बनाए गए। साथ ही श्रेणी के अनुसार ट्रैकर्स की संख्या के अनुसार गाइड और पोर्टर आदि की संख्या व कुक व पोर्टरों को दो दिन का मेडिकल प्रशिक्षण आदि के नियम बनाए गए। लेकिन इन नियमों का पालन करवाने में जिला प्रशासन सहित संबंधित वन विभाग व पर्यटन विभाग सफल साबित नहीं हुआ है। इसलिए दो वर्ष बाद ही एसओपी में बदलाव की बात कही जा रही है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य का कहना है कि एसओपी में सुरक्षा को देखते हुए कुछ मानक जोड़े जाएंगे। इसके पालन के लिए भी नियमों को सख्त किया जाएगा।
हादसे: जो उत्तरकाशी के विभिन्न ट्रैक पर हुए
1. सितंबर 2002 को गंगोत्री-3 पर दो बंगाल के पर्वतारोही व एक पोर्टर की मौत।
2. सितंबर 2003 को केदारडोम चोटी पर दो बंगाल के पर्वतारोहियों की मौत।
3. सितंबर 2005 को कालिंदी ट्रैक पर जर्मन पर्यटकों के साथ गए एक पोर्टर की मौत।
4. सितंबर 2005 को सतोपंथ आरोहण के दौरान सेना के पर्वतारोही की मौत।
5. सितंबर 2007 में कालिंदी ट्रैक पर छह पोर्टरों की मौत।
6. सितंबर 2009 को सतोपंथ आरोहण के दौरान गढ़वाल राइफल्स के जवान की मौत।
7. सितंबर 2010 को कालिंदी ट्रैक पर लापता तीन बंगाल के ट्रैकर्स व पांच पोर्टरों की मौत।
8. अप्रैल 2018 चाईशिल बुग्याल में एक ट्रैकर की मौत।
9. मई 2018 केदारताल ट्रैक पर एक पोर्टर की मौत।
10. मई 2019 खिमलोगा-छितकुल पर मोरी के एक पोर्टर की मौत।
11. जून 2018 सांकरी-यमुनोत्री ट्रैक पर एक पोर्टर की मौत।
12. जून 2018 हरीकेदून-छितकुल ट्रैक पर एक ट्रैकर की मौत।
13. सितंबर 2018 गंगोत्री-भोजवासा ट्रैक पर एक की मौत।
14. अक्टूबर 2018 हरीकेदून ट्रैक पर एक ट्रैकर की मौत।
15. अक्टूबर 2021-आईटीबीपी की लंबी दूरी पेट्रोलिंग के दौरान हिमस्खलन के कारण 3 पोर्टरों की मौत।
16. वर्ष 2021-लमखागा-छितकुल ट्रैक पर हिमस्खलन के कारण 7 की मौत।
17. वर्ष 2022-द्रोपदी का डांडा-2 चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन में निम के 29 प्रशिक्षुओं की मौत।
18. वर्ष 2023-रुनसारा ताला ट्रैक मोरी में तबीयत बिगड़ने से 2 ट्रैकर की मौत।
19. वर्ष 2023-गंगोत्री-कालिंदीखाल ट्रैक पर तबीयत बिगड़ने से एक ट्रैकर की मौत।
20. वर्ष 2024- सहस्त्रताल ट्रैक पर नौ ट्रैकर्स की बर्फीले तूफान में फंसने से मौत।
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