हवाई टिकट बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव, अब एयरलाइंस को किराये से लेकर रिफंड तक बताना होगा पूरा हिसाब
अभी तक कई बार ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को शुरुआत में कम किराया दिखाई देता है, लेकिन बुकिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर टैक्स, फीस और दूसरे शुल्क जुड़ने से कुल कीमत बढ़ जाती है। कई यात्रियों को यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि टिकट रद्द कराने पर कितनी राशि काटी जाएगी और उन्हें कितना पैसा वापस मिलेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य टिकट बुकिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और यात्रियों को भुगतान से पहले सभी जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराना है।
सरकार ने 31 अक्टूबर को भारतीय वायुयान नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों के अनुसार, एयरलाइंस को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और अन्य बुकिंग प्लेटफॉर्म पर टिकट की कुल कीमत के साथ प्रत्येक शुल्क का अलग-अलग विवरण दिखाना अनिवार्य होगा। यात्रियों को यह जानकारी भी मिलेगी कि टिकट की मूल कीमत कितनी है और उसमें विभिन्न मदों के तहत कितना अतिरिक्त पैसा जोड़ा गया है। इतना ही नहीं, बुकिंग पूरी होने के बाद जारी किए जाने वाले टिकट पर भी सभी शुल्कों का स्पष्ट ब्यौरा देना होगा।
नए नियमों के तहत टिकट का बेस फेयर यानी मूल किराया अलग दिखाना होगा। इसके अलावा टिकट पर लगाए गए टैक्स, मूल किराये के अतिरिक्त ली जाने वाली फीस और अन्य शुल्कों की जानकारी भी स्पष्ट रूप से देनी होगी। यदि टिकट रद्द कराने पर कोई कैंसिलेशन चार्ज लागू होता है, तो उसकी राशि भी पहले से बतानी होगी। इसी तरह रिफंड की शर्तें भी स्पष्ट करनी होंगी, ताकि यात्री समझ सकें कि टिकट कैंसिल कराने की स्थिति में उन्हें कितनी रकम वापस मिलेगी और इसके लिए क्या नियम लागू होंगे।
हवाई किराये को लेकर भी नए नियमों में महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। किसी असाधारण परिस्थिति में केंद्र सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए विमान कंपनियों के किराये के मामले में हस्तक्षेप कर सकेगी। इसके लिए सरकार लिखित आदेश जारी कर जरूरी निर्देश दे सकती है। हालांकि, किन परिस्थितियों को असाधारण माना जाएगा और किन हालात में सरकार किराये को लेकर दखल देगी, इसकी स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई है।
विमान कंपनियों की ओर से निर्धारित किराये की निगरानी नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए करेगा। नए प्रावधानों में किराये और उससे संबंधित शुल्कों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
इन नियमों की पृष्ठभूमि में विमानन क्षेत्र के पुराने कानूनी ढांचे में बदलाव भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 2024 में सरकार ने भारतीय वायुयान विधेयक तैयार किया था, जिसने लगभग 90 साल पुराने विमान अधिनियम, 1934 की जगह ली। संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून का दर्जा मिला। अब भारतीय वायुयान नियम, 2026 के नए प्रावधान 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे और विमान नियम, 1937 का स्थान लेंगे। इसके बाद यात्रियों को टिकट खरीदने से पहले ही किराये और उससे जुड़े सभी शुल्कों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराना एयरलाइंस के लिए अनिवार्य होगा।
