ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी ने किया हमला, सीजफायर के बीच बढ़ा तनाव
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों को छोटे स्तर पर रखा गया और जानबूझकर गोपनीय बनाया गया, ताकि सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने का कोई स्पष्ट संकेत न जाए।
इस घटनाक्रम के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका में मध्यावधि चुनाव खत्म होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ बड़े हमले का दबाव बना रहे थे। चुनाव के दौरान ट्रंप ने भी संकेत दिए थे कि ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है।
ट्रंप ने किया था बड़ा युद्ध टलने का दावा
केशम द्वीप पर धमाकों की खबर ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि ईरान के साथ बड़ा युद्ध टल सकता है। उन्होंने दावा किया था कि इसी उम्मीद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है।
इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर दावा किया था कि कच्चे तेल की कीमत करीब 10 डॉलर प्रति बैरल गिर गई है। उन्होंने इसे रिकॉर्ड गिरावट बताया था। ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान जल्द से जल्द अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है।
हमले से कुछ घंटे पहले वेंस ने जताई थी समझौते की उम्मीद
अमेरिकी हमले की खबरों से कुछ घंटे पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई थी। वेंस ने पिछले सप्ताह ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा था। इस पत्र के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कई अच्छी बातचीत हुई है।
वेंस ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर करीब एक घंटे पहले ही उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत हुई थी। उन्होंने दोनों देशों के बीच समझौता होने की उम्मीद जताई थी।
मध्यावधि चुनाव और इजरायल का दबाव
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को देखते हुए ट्रंप ईरान पर बड़े हमले से बचते नजर आ रहे थे। दूसरी ओर, इजरायल लगातार अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बना रहा था। अब केशम द्वीप पर हमले की खबरों ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ता रहा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ सकती है।
