November 1, 2026

फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच कौन फैला रहा हिंसा, नकाबपोश 'कैसर्स' की भूमिका से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

0
24-1793530012
नई दिल्ली ।फ्रांस में महंगाई, आर्थिक असमानता और सरकारी नीतियों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक घटनाओं के कारण चर्चा में हैं। लगातार तीसरे सप्ताहांत हजारों लोग सड़कों पर उतरे। देश के अधिकांश हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन 31 अक्टूबर को रैलियां समाप्त होने के दौरान पेरिस सहित कई शहरों में नकाबपोश लोगों के समूहों की पुलिस से झड़प हो गई। इन घटनाओं के बाद सवाल उठने लगा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच हिंसा फैलाने वाले ये लोग कौन हैं और उनका विरोध करने का तरीका क्या है?

फ्रांस में ऐसे उपद्रवियों के लिए ‘कैसर्स’ शब्द इस्तेमाल किया जाता है। फ्रांसीसी भाषा में इसका अर्थ तोड़फोड़ करने वाले होता है। ये किसी एक पंजीकृत संगठन या राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग छोटे समूहों में सक्रिय रहते हैं। प्रदर्शन के दौरान इनकी गतिविधियों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, पुलिस से भिड़ना और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करना शामिल बताया जाता है।

इन समूहों में अक्सर युवा और कट्टर वामपंथी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बताई जाती है। इन्हें कई बार अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों के रूप में भी पहचाना जाता है। हालांकि, इनका कोई केंद्रीय नेतृत्व या साझा सदस्यता व्यवस्था सामने नहीं आई है। अलग-अलग समूहों में सक्रिय रहने के कारण इनकी पहचान और संगठनात्मक ढांचे का पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहता है।

कैसर्स आमतौर पर बड़े प्रदर्शनों के दौरान रैलियों के किनारे या उनके अंतिम पड़ाव पर सक्रिय होते हैं। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने के बजाय ये पुलिस के साथ टकराव और तोड़फोड़ की घटनाओं में शामिल होते हैं। पहचान छिपाने के लिए नकाब, चश्मे और काले कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ घटनाओं में इनके पास हथौड़े और आतिशबाजी से जुड़ी सामग्री भी देखी गई है। बैंकों, रियल एस्टेट कार्यालयों और बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की घटनाएं भी इनके विरोध के तरीकों में शामिल बताई जाती हैं।

31 अक्टूबर को फ्रांस के विभिन्न शहरों में करीब 3.20 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। इनमें लगभग 70 हजार लोग अकेले पेरिस में सड़कों पर उतरे थे। अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन राजधानी में पोर्टे डी शारांटों के आसपास स्थिति बिगड़ गई। काले कपड़े पहने दर्जनों नकाबपोश लोगों ने हथौड़ों से सड़क के पत्थर उखाड़कर पुलिस पर फेंके। सुरक्षा बलों पर एक आग लगाने वाला उपकरण भी फेंका गया। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस, स्टन ग्रेनेड और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ सौ उपद्रवियों का एक समूह लगातार सुरक्षा बलों पर हमले कर रहा था। पेरिस में 400 से 800 कट्टर वामपंथी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, यह अनुमानित संख्या थी और इससे सभी उपद्रवियों की प्रमाणित पहचान नहीं होती।

इस बार हैलोवीन के त्योहार ने भी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। कई प्रदर्शनकारी स्पाइडरमैन और फ्रैंकेंस्टाइन जैसे किरदारों की पोशाक पहनकर पहुंचे। कुछ लोगों ने हैलोवीन के मुखौटों से चेहरे ढके। गृह मंत्री लॉरां नूनेज ने चेतावनी दी थी कि पहचान छिपाने के लिए चेहरा ढकने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर हैलोवीन की रात क्रांति शुरू करने की अपील वाले संदेश भी सामने आए थे।

इन घटनाओं के बीच कैसर्स को अप्रवासी समुदाय से जोड़ने की कोशिशों पर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन हिंसक समूहों को सीधे अप्रवासी समुदाय से जोड़ने का कोई ठोस आधार नहीं है। इनमें फ्रांसीसी नागरिकों और कट्टर वामपंथी विचारधारा से जुड़े युवाओं की भी बड़ी संख्या बताई गई है।

दरअसल, मौजूदा आंदोलन की शुरुआत महंगाई, बढ़ती जीवनयापन लागत, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति के विरोध में हुई थी। इसमें छात्र, ट्रेड यूनियन और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हैं। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद नागरिक स्वतंत्रता तथा विरोध के अधिकार की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बन गई।

17 अक्टूबर को हुए शुरुआती बड़े प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों में आगजनी हुई थी। अब छात्र संगठनों ने नवंबर के पहले सप्ताह में स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद कराने तथा 5 नवंबर को मजदूर संगठनों के साथ प्रदर्शन करने की घोषणा की है। ऐसे में फ्रांस में आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी रहेगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *