November 1, 2026

सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

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नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ रही दोनों कीमती धातुओं के भाव में अचानक बड़ी टूट दर्ज की गई है। इस गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 1,78,900 रुपये पर बंद हुई। वहीं, सोने की कीमत में 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई और यह 1,38,419 रुपये पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस रह गई, जबकि स्पॉट सिल्वर में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई और इसका भाव 49.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।

इस गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों की कीमतों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। महंगी ऊर्जा के कारण दुनिया भर में महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना भी बाजार की चिंता का हिस्सा बनी हुई है। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने और चांदी जैसी संपत्तियों का आकर्षण प्रभावित होता है। इन धातुओं से नियमित ब्याज या निश्चित आय नहीं मिलती। इसके विपरीत, फिक्स्ड इनकम और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प बेहतर रिटर्न की संभावना पेश करते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे साधनों में निवेश करना पसंद कर सकते हैं। इसी बदलाव ने सोने-चांदी पर बिकवाली का दबाव बढ़ाया है।

वैश्विक शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। बाजार में नुकसान झेल रहे बड़े निवेशकों और संस्थागत कारोबारियों ने नकदी जुटाने तथा घाटे की भरपाई के लिए सोने-चांदी जैसी आसानी से बेची जा सकने वाली संपत्तियों में बिकवाली की। बाजार में इस प्रक्रिया को लिक्विडेशन कहा जाता है।

चीन से जुड़ी गतिविधियों ने भी दबाव बढ़ाया है। दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल चीन में निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोने की बिक्री किए जाने की खबरों ने बाजार की धारणा प्रभावित की। चांदी में गिरावट सोने से अधिक रही, क्योंकि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी होता है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और शेयर बाजार की अस्थिरता ने इसकी कीमतों को ज्यादा प्रभावित किया।

कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा पुराने रिकॉर्ड से लगाया जा सकता है। जनवरी 2026 में चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। मौजूदा भाव के आधार पर यह अपने शिखर से 50 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुकी है। वर्ष 2025 में चांदी ने करीब 170 प्रतिशत का रिटर्न दिया था। इसी तरह जनवरी 2026 में सोने का भाव 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह अपने उच्चतम स्तर से 42,321 रुपये नीचे आ चुका है। इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,40,054 रुपये रह गई है।

हालांकि, घरेलू बाजार में आने वाले दिनों में मांग बढ़ने से कीमतों को सहारा मिलने की उम्मीद है। नवंबर में धनतेरस, दिवाली और शादी-विवाह के सीजन के कारण आभूषणों तथा भौतिक सोने की खरीदारी बढ़ सकती है। 6 नवंबर को धनतेरस होने के कारण बाजार को त्योहारी खरीदारी से विशेष उम्मीद है।

इसके अलावा, दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार अपने भंडार में सोना शामिल कर रहे हैं। उनकी खरीदारी से सोने की दीर्घकालिक मांग को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतों की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों की स्थिति पर निर्भर करेगी। त्योहारी मांग और औद्योगिक खपत से सुधार की संभावना जरूर है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं।

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