भाजपा युवा मोर्चा की नियुक्तियों से संगठन में मचा घमासान, परिवारिक विवाद से लेकर निष्कासन तक के मामले आए सामने
बालाघाट में अमन गांधी को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पारिवारिक विवाद चर्चा में आ गया। नियुक्ति की घोषणा वाली रात ही विवाद सामने आया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को उनकी भाभी पूजा गांधी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शराब के नशे में अमन गांधी उनके ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके और उनके पति के साथ मारपीट की। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई। पूजा गांधी ने पुलिस से खुद अपने पति और छह वर्षीय बच्चे की सुरक्षा की मांग की है। बताया गया है कि इसी परिवार के खिलाफ अगस्त में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस स्तर पर की जानी है।
मंडला में उत्कर्ष यादव की नियुक्ति भी विवादों में है। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद ससुराल पक्ष की ओर से थार गाड़ी की मांग की जाने लगी और इसके लिए उन्हें प्रताड़ित किया गया। इस मामले में जून 2026 में लखनादौन थाने में उत्कर्ष यादव और उनके परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। ऐसे मामले के बीच जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने से नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
नर्मदापुरम में कुलदीप रघुवंशी को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी के पुराने फैसले की चर्चा फिर शुरू हो गई है। वर्ष 2023 में इटारसी नगर मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद के दौरान कुलदीप और उनके साथियों पर मारपीट का आरोप लगा था। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद तत्कालीन जिला अध्यक्ष माधवदास अग्रवाल ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यह निष्कासन वर्ष 2029 तक बताया गया था। अब करीब साढ़े तीन साल में ही उनकी वापसी और सीधे जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कुलदीप रघुवंशी का कहना है कि एक घटना में उनका नाम जुड़वा दिया गया था और डेढ़ महीने में ही वे उस मामले में दोषमुक्त हो गए थे। इसके बाद पार्टी में उनकी वापसी हुई थी।
सिवनी में योगेश शिवहरे को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर संगठन के भीतर नाराजगी की बात सामने आई है। आरोप है कि जिला स्तर पर कोर ग्रुप की सहमति से तैयार पैनल को नजरअंदाज कर नियुक्ति की गई। पैनल में नाम नहीं होने के बावजूद जिम्मेदारी मिलने से कुछ युवा नेताओं में असंतोष है। वहीं इंदौर ग्रामीण में अजय सिंह पंवार की नियुक्ति को लेकर सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया गया है। लगातार तीसरी बार राजपूत समाज से अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा के बीच कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई। उम्र सीमा और अलग-अलग क्षेत्रों के दावेदारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
सागर में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जसवंत राठौर की नियुक्ति के बाद उनके परिवार से जुड़ी पुरानी आयकर विभाग की कार्रवाई भी चर्चा में है। 5 जनवरी 2025 को आयकर विभाग ने पूर्व भाजपा विधायक हरवंश सिंह राठौर के आवास सहित तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई बीड़ी कारोबार संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच से जुड़ी थी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जसवंत राठौर के खिलाफ इस कार्रवाई में सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
इन घटनाओं के बाद भाजयुमो की नियुक्ति प्रक्रिया और संगठन के फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अलग-अलग जिलों में सामने आए विवादों ने नए पदाधिकारियों के चयन और संगठन के भीतर सामाजिक तथा राजनीतिक संतुलन पर बहस तेज कर दी है। अब इन मामलों में संबंधित शिकायतों और संगठन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
