November 1, 2026

धनतेरस से पहले बना दुर्लभ संयोग, रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग में खरीदारी से जुड़ेगी समृद्धि की मान्यता

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भोपाल । त्योहारों के मौसम में खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए 1 नवंबर का दिन विशेष माना जा रहा है। धनतेरस से पांच दिन पहले रविवार को रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सोना चांदी वाहन मकान जमीन और कारोबार से जुड़ी वस्तुएं खरीदने से सुख समृद्धि आती है। यही वजह है कि बाजारों में भी इस दिन ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रहने की उम्मीद है। इसे अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। यानी शुभ कार्य करने के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती।

भोपाल के ज्योतिष मठ संस्थान के पंचांग कार्यकर्ता पं. विनोद गौतम के अनुसार 1 नवंबर को सुबह 5 बजकर 39 मिनट से पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। यह नक्षत्र 2 नवंबर की सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र होने से रवि पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही 1 नवंबर को सुबह 6 बजकर 33 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग भी शुरू होगा जो अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन दोनों योगों को शुभ कार्यों और खरीदारी के लिए अच्छा माना जाता है।

खरीदारी के लिए दिन में दो विशेष मुहूर्त बताए गए हैं। पहला अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम को गोधूलि मुहूर्त 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। इन समयों में लोग अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि पूरे दिन रवि पुष्य योग रहने की मान्यता के चलते इस दिन को खरीदारी के लिए विशेष महत्व दिया जा रहा है।

पं. गौतम के मुताबिक 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। इसके देवता देवगुरु बृहस्पति और स्वामी शनिदेव माने गए हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पुष्य नक्षत्र में किया गया निवेश लंबे समय तक लाभ देने वाला माना जाता है। इसी कारण इस दिन सोना चांदी लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां और सिक्के खरीदने की परंपरा है। इसके अलावा नया वाहन खरीदने या मकान जमीन फ्लैट दुकान और फैक्ट्री के लिए मशीनरी लेने को भी शुभ माना जाता है।

व्यापारियों के लिए भी यह दिन नई शुरुआत का अवसर लेकर आया है। वे नए खाते बही शुरू कर सकते हैं और दुकान या कारोबार का शुभारंभ कर सकते हैं। जिन लोगों का बजट बड़ी खरीदारी की अनुमति नहीं देता वे भी इस अवसर पर छोटी वस्तुएं खरीद सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार श्री यंत्र शंख कौड़ी चंदन इत्र और मिट्टी के दीये खरीदना भी शुभ माना गया है। इस तरह कम बजट में भी लोग इस विशेष योग से जुड़ी परंपराओं का पालन कर सकते हैं।

इस बार 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत भी रखा जाएगा। इस दिन माताएं संतान की सुख समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए व्रत करती हैं। पं. गौतम के अनुसार इस अवसर पर चांदी की अहोई और बच्चों के लिए चांदी के आभूषण खरीदने की भी परंपरा है। इसके साथ ही दान पुण्य और गुरु मंत्र का जाप करना भी शुभ फलदायी माना जाता है।

धनतेरस और दीपावली से पहले आने वाला यह रवि पुष्य योग खरीदारी के लिहाज से खास महत्व रखता है। सोना चांदी और वाहन जैसे बड़े सामान खरीदने वालों के साथ ही छोटे बजट में खरीदारी करने वाले लोग भी इस दिन का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि इन सभी शुभ फलों का आधार ज्योतिषीय मान्यताएं और धार्मिक परंपराएं हैं। खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

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