October 30, 2026

दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

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नई दिल्ली । दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.59 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में करीब 1.96 प्रतिशत की गिरावट आई। कारोबार के दौरान चांदी 3,730 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई। वैश्विक बाजार में कमजोर रुख और अमेरिका की आर्थिक परिस्थितियों को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले कारोबारी बंद भाव 1,42,596 रुपये प्रति 10 ग्राम से 843 रुपये नीचे आकर 1,41,753 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें लगभग 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी का भाव पिछले बंद स्तर 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 1,85,723 रुपये पर आ गया। इसमें 3,730 रुपये यानी करीब 1.96 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी की कीमत 1.20 प्रतिशत टूटकर 51.750 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बदलती परिस्थितियों का असर सोने-चांदी की मांग पर पड़ रहा है।

बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह अमेरिका में महंगाई के आंकड़े हैं। सितंबर में अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई दर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना दर 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

बाजार में यह आशंका भी बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उपलब्ध बाजार अनुमानों के अनुसार, इस संभावना को 80 प्रतिशत से अधिक माना जा रहा है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर निवेशकों का रुझान उन विकल्पों की ओर बढ़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज मिलता है। सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में इनकी मांग प्रभावित होती है।

तकनीकी स्तरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि कीमत इस दायरे से नीचे जाती है तो इसमें 1.37 लाख से 1.38 लाख रुपये तक गिरावट की संभावना बन सकती है। चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर अहम माना जा रहा है।

चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना इस साल बने रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट काफी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में लगातार कमजोरी आई और अब यह अपने रिकॉर्ड स्तर के आधे से भी कम भाव पर कारोबार कर रही है।

इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर दबाव आ सकता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का फैसला टाल सकते हैं।

अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 8 और 9 दिसंबर को होने वाली बैठक पर है। साथ ही महंगाई और रोजगार से जुड़े आगामी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटती है तो सोने-चांदी की कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत महंगाई के मजबूत आंकड़े आने पर गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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