ईरान के पास पहुंचा जेडी वेंस का शांति संदेश, तेहरान की चुप्पी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, क्या खत्म होगा अमेरिका से युद्ध?
समाचार एजेंसी तस्नीम ने एक सूत्र के हवाले से बताया है कि ईरान को अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पत्र प्राप्त हो गया है। हालांकि तेहरान ने फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक जेडी वेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर यह संदेश भेजा है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खोलना और अमेरिका की ओर से संभावित नए सैन्य हमलों को रोकने की संभावनाओं पर चर्चा करना है। फिलहाल यह पहल किसी अंतिम शांति समझौते की शर्तें तय करने के बजाय बातचीत की रूपरेखा तैयार करने पर केंद्रित बताई जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। उस दिन अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस्राइल और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। धीरे-धीरे यह संघर्ष व्यापक रूप लेता गया और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता चला गया।
युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर देखने को मिला। ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पर सख्त पाबंदियां लगा दीं। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
ईरान ने इस समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इस संबंध में मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है। तेहरान की प्रमुख मांगों में पूरे क्षेत्र में युद्धविराम लागू करना और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों पर लगी रोक हटाना शामिल है। इसके अलावा ईरान अपने तेल उद्योग पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध खत्म करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तत्काल हटाने की मांग भी कर रहा है।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी ओर से तय किए गए सख्त ढांचे को कमजोर करने वाली किसी भी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे साफ है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार होने के बावजूद अपनी शर्तों पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर अमेरिका की पहल से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जरूर जगी है लेकिन ईरान की चुप्पी ने स्थिति को अनिश्चित बना दिया है।
