ट्रेन के टॉयलेट में पानी नहीं मिलने से बीच सफर उतर गया परिवार, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर लगाया 16 हजार रुपये का भुगतान
नई दिल्ली । ट्रेन में बुनियादी सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। कर्नाटक में एक परिवार को यात्रा के दौरान शौचालयों में पानी नहीं मिलने के कारण अपना सफर बीच में ही छोड़ना पड़ा। परिवार का आरोप था कि तुमकुरु रेलवे स्टेशन पर मदद मांगने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद यात्रियों को दूसरी ट्रेन से आगे की यात्रा करनी पड़ी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त टिकट खरीदने पड़े। अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में रेलवे को मूल किराया ब्याज सहित लौटाने और मुआवजे के साथ मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।
यह मामला ट्रेन नंबर 66575 से जुड़ा है। शिवमोगा के बसवनगुडी स्थित पीडब्ल्यूडी क्वार्टर्स में रहने वाले नागेंद्र अपने 23 परिवारजनों और रिश्तेदारों के साथ यशवंतपुर से शिवमोगा जा रहे थे। समूह में कुल 24 लोग शामिल थे। सभी यात्रियों ने यात्रा के लिए कुल 1,000 रुपये के जनरल टिकट खरीदे थे।
यात्रा के दौरान परिवार के सदस्यों ने शिकायत की कि ट्रेन के शौचालयों में पानी उपलब्ध नहीं था। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने तुमकुरु रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर से संपर्क कर सहायता मांगी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। समस्या दूर नहीं होने पर परिवार ने ट्रेन से उतरकर दूसरी ट्रेन पकड़ने का फैसला किया।
दूसरी ट्रेन से आगे जाने के लिए परिवार को नए टिकट खरीदने पड़े। इस वजह से उन्हें 1,760 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। यात्रियों का कहना था कि यदि ट्रेन में जरूरी सुविधा उपलब्ध होती और समय पर सहायता मिल जाती, तो उन्हें बीच रास्ते में यात्रा बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस घटना के बाद नागेंद्र ने रेलवे अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। हालांकि, नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने शिवमोगा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में ट्रेन के शौचालयों में पानी नहीं होने, स्टेशन पर मदद नहीं मिलने और दूसरी ट्रेन से यात्रा करने के कारण हुए अतिरिक्त खर्च का मुद्दा उठाया गया।
मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने 23 अक्टूबर को अपना आदेश सुनाया। आयोग के अध्यक्ष टी. शिवन्ना और सदस्य बीडी योगानंद भंड्या की पीठ ने दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु और तुमकुरु स्टेशन मास्टरों को मूल टिकट किराया लौटाने का निर्देश दिया। आदेश के अनुसार, रेलवे को नागेंद्र को 1,000 रुपये का मूल किराया 15 अप्रैल 2025 से छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करना होगा।
इसके अतिरिक्त, परिवार को हुई परेशानी के लिए 10,000 रुपये मुआवजा और मुकदमे पर हुए खर्च के लिए 5,000 रुपये देने होंगे। इस प्रकार मूल किराये की वापसी, मुआवजे और कानूनी खर्च को मिलाकर रेलवे को कुल 16,000 रुपये का भुगतान करना होगा। मूल किराये पर निर्धारित ब्याज की राशि इसके अतिरिक्त होगी।
आयोग ने भुगतान के लिए रेलवे को 45 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर देय राशि पर 10 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा, जो पूरा भुगतान होने तक लागू रहेगा। इस मामले में आयोग ने ट्रेन में पानी जैसी बुनियादी सुविधा की कमी और स्टेशन पर सहायता नहीं मिलने से यात्रियों को हुई परेशानी को सेवा में कमी के रूप में देखा।
