आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब का तांडव… 5 की मौत, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद, CM ने किया राहत का ऐलान
विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार तड़के राज्य के तटीय इलाकों से गुजरे इस भीषण चक्रवाती तूफान (Cyclonic storm) के कारण पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि फसलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (Chief Minister N. Chandrababu Naidu) ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए भी आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री नायडू ने बुधवार शाम राज्य सचिवालय स्थित रियल टाइम गवर्नेंस सिस्टम (आरटीजीएस) केंद्र में हालात की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया कि तूफान के कारण कई जिलों में जान-माल का नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, राज्य में करीब 15 हजार बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। वहीं, हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं या उन्हें नुकसान पहुंचा है।
अब ये तूफान ओडिशा में दस्तक दे चुका है। हालांकि पहले से इसकी तीव्रता कम हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चेतावनी दी कि आंध्र प्रदेश में तबाही मचाने के बाद, जैसे-जैसे चक्रवात ओडिशा की ओर बढ़ेगा, मलकानगिरि और अधिक प्रभावित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा, ”सरकार गंजाम, गजपति, रायगडा, कोरापुट, मलकानगिरि और नबरंगपुर जिलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।”
कहां कितने लोगों की मौत हुई?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के मुताबिक, चक्रवात के कारण पांच लोगों की जान गई है। इनमें से तीन की मौत विशाखापत्तनम जिले में बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से हुई। इसके अलावा अनाकापल्ली और भीमावरम में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। नायडू ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
3.45 लाख किसानों पर असर, 2.24 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित
चक्रवात और इसके साथ हुई बारिश ने कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, शुरुआती अनुमान में करीब 3.45 लाख किसानों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। राज्य के 14 जिलों में 2,24,489 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें जलमग्न हुई हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर फसलों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कृषि और बागवानी फसलों को लगभग 70,900 हेक्टेयर क्षेत्र में नुकसान पहुंचने का अनुमान है। इनमें धान की फसल भी शामिल है। करीब 10,450 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के जलमग्न होने या क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है।
प्रभावित किसानों को कितना मुआवजा मिलेगा?
– राज्य सरकार ने चक्रवात से प्रभावित किसानों के लिए फसल के प्रकार और नुकसान की सीमा के आधार पर आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
– कपास और गन्ने की फसल के लिए 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।
– केले की खेती को नुकसान होने पर 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे।
– टमाटर की फसल के लिए 25,000 रुपये की सहायता घोषित की गई है।
– अन्य फसलों के किसानों को सरकार की राहत व्यवस्था के तहत संबंधित श्रेणियों के अनुसार आर्थिक मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नुकसान के ये आंकड़े शुरुआती आकलन पर आधारित हैं। फील्ड सर्वे पूरा होने के बाद इनमें बदलाव हो सकता है। सत्यापन के बाद राज्य सरकार केंद्र को नुकसान का विस्तृत ब्योरा सौंपेगी।
180 मकान क्षतिग्रस्त, सड़कों पर गिरे 220 से ज्यादा पेड़
चक्रवात ने बिजली व्यवस्था के साथ-साथ मकानों और सड़कों को भी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब 180 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इनमें ज्यादातर मकान कोनसीमा जिले में हैं। राज्य की सड़कों पर 220 से अधिक पेड़ गिर गए थे। इनमें से बुधवार दोपहर तक 170 से ज्यादा पेड़ों को हटाया जा चुका था। तटीय इलाकों में सड़क संबंधी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गोदावरी डेल्टा के तटीय इलाकों में तूफान का असर खास तौर पर देखने को मिला। इनमें कोनसीमा, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, कृष्णा और अनाकापल्ली जिले शामिल हैं। विशाखापत्तनम के चार वार्डों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। पेड़ गिरने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए दमकल और आपातकालीन सेवा कर्मियों को 220 से अधिक कॉल मिलीं।
28 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
चक्रवात के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, एहतियाती कदम के तौर पर 28 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया। मछली पकड़ने वाली सभी नौकाओं को भी वापस बंदरगाह पर बुला लिया गया।
प्रशासन ने प्रभावित जिलों में चिकित्सा दल, एंबुलेंस, राहत सामग्री, बिजली आपूर्ति बहाल करने वाली टीमें और सड़क से मलबा हटाने वाले कर्मियों को तैनात किया है। जिला कलेक्टरों को मौके पर राहत कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार ने 14 जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 16 और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की 11 टीमों को तैनात किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से लगातार सहयोग देने की अपील की। उन्होंने नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम जल्द भेजने का भी आग्रह किया।
नायडू ने कहा कि प्रशासन का ध्यान उन परिवारों की मदद पर रहेगा, जिन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है या जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों से खतरा पूरी तरह टलने तक राहत एवं बचाव दल तैनात रहेंगे।
125 से 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, चक्रवात अर्नब बुधवार सुबह दो बजे से आठ बजे के बीच आंध्र प्रदेश-यानम तट से गुजरा। उस समय यह अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान था और इसकी अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे थी। सुबह करीब 8:30 बजे यह कमजोर होकर भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया। इसके बाद हवा की रफ्तार घटकर 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे रह गई।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो दिनों में तूफान के उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना थी। इसके धीरे-धीरे कमजोर होकर चक्रवाती तूफान और फिर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदलने का अनुमान जताया गया। इसके दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों से गुजरने के बाद उत्तर-पश्चिम दिशा में छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की संभावना थी।
ओडिशा में भी अलर्ट, 30 हजार से ज्यादा लोगों को निकाला गया
चक्रवात से प्रभावित ओडिशा में भी प्रशासन ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए। बारिश के कारण राज्य में 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि निचले इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों से लोगों को निकालने का अभियान जारी था। उन्होंने कहा कि चक्रवात का असर बढ़ने के कारण अगले 24 घंटे बेहद अहम रहने की आशंका थी।
संवेदनशील इलाकों में कुल 313 राहत एवं बचाव दल तैनात किए गए। इनमें ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) की 60, एनडीआरएफ की नौ और दमकल एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें शामिल थीं। राज्य की सभी 19,143 मछली पकड़ने वाली नौकाएं तट पर लौट आई थीं। भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर कुछ सड़कों पर आवाजाही भी रोकी गई।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी। उन्होंने बताया कि 10 स्थानों पर पेड़ गिरने जैसी छोटी बाधाओं को समय रहते दूर कर लिया गया। भुवनेश्वर हवाई अड्डे के निदेशक प्रसन्ना प्रधान के मुताबिक, उड़ानों का परिचालन ज्यादातर सामान्य था, हालांकि एक उड़ान रद्द हुई। प्रभावित विशाखापत्तनम हवाई क्षेत्र से बचने के लिए चेन्नई और हैदराबाद से भुवनेश्वर आने वाली उड़ानों को रायपुर के ऊपर से वैकल्पिक मार्ग दिया गया।
ओडिशा के नबरंगपुर, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरि, गजपति और गंजाम जिलों में अत्यंत भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया था। इन इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई। हालांकि, राज्य के विशेष राहत आयुक्त राजेश पी. पाटिल ने बताया कि दक्षिणी जिलों के कुछ हिस्सों में पेड़ गिरने की घटनाएं हुईं, लेकिन बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं थी।
