चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट
न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है। बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाकर विरोधी टीम पर दबाव बनाया है और गेंदबाजों ने भी कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि भुवनेश्वर कुमार के लिए शुरुआती मुकाबले चुनौतीपूर्ण साबित हुए। पहले मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए जबकि दूसरे मुकाबले में उनके खाते से 50 रन खर्च हुए। तीसरे टी20 में भी उन्होंने चार ओवर में 40 रन दिए। हालांकि पिछले दो मैचों की तुलना में उनके प्रदर्शन में कुछ सुधार दिखाई दिया लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिल सका। तीन मैचों में उनकी इकोनॉमी 11.58 रन प्रति ओवर रही है जो टी20 क्रिकेट के लिहाज से काफी महंगी मानी जाती है।
भुवनेश्वर कुमार को भारतीय क्रिकेट में उनकी शानदार स्विंग गेंदबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता के लिए जाना जाता है। नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने की उनकी कला ने उन्हें लंबे समय तक टीम इंडिया का अहम गेंदबाज बनाए रखा। लेकिन लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। मैच की परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाजी करना और दबाव के बीच सही लाइन और लेंथ बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भुवनेश्वर को भी अपनी पुरानी लय पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।
टीम प्रबंधन को अनुभव पर भरोसा
शुरुआती तीन मुकाबलों में महंगे साबित होने के बावजूद टीम प्रबंधन और मुख्य कोच ने भुवनेश्वर कुमार के अनुभव पर भरोसा जताया है। टीम का मानना है कि लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के कारण खिलाड़ी को लय में लौटने में समय लग सकता है। मेरठ के गांधी बाग में क्रिकेट कोच तनकीब अहमद ने भी माना कि लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने पर खिलाड़ी के ऊपर दबाव रहता है। हर खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है और भुवनेश्वर भी आने वाले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कोच अतरह अली के मुताबिक भी वापसी के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहता है और खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करता है।
अगले मुकाबलों में लय हासिल करने की चुनौती
अब सीरीज के अगले मैच भुवनेश्वर कुमार के लिए काफी अहम होंगे। उन्हें अपनी गेंदबाजी में सटीकता लाने के साथ विकेट निकालने की क्षमता भी दिखानी होगी। शुरुआती ओवरों में रन रोकना और बल्लेबाजों को गलतियां करने के लिए मजबूर करना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। यदि वह अपनी स्विंग और अनुभव का सही इस्तेमाल कर पाए तो टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल उनके प्रदर्शन पर सवाल जरूर उठ रहे हैं लेकिन सीरीज के बाकी मुकाबलों में वापसी करने का अवसर उनके पास है। अब देखना होगा कि अनुभवी भुवी अपने प्रदर्शन में कितना सुधार कर पाते हैं और टीम प्रबंधन के भरोसे पर किस तरह खरे उतरते हैं।
