मध्यप्रदेश की योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, हर भाजपा सांसद बनेगा केंद्रीय मंत्रालय का कॉर्डिनेटर
इस प्रस्ताव के तहत सांसदों की भूमिका केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि उन्हें केंद्र और राज्य के बीच संपर्क की एक अतिरिक्त कड़ी के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। मध्यप्रदेश के अलग-अलग विभागों को केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी परियोजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से लगातार संपर्क करना पड़ता है। कई बार इन मामलों में जानकारी जुटाने और निर्णय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में समय लगता है। ऐसे में यदि प्रत्येक मंत्रालय के लिए एक सांसद की जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित विभागों को अपने मुद्दे उठाने के लिए एक निर्धारित माध्यम मिल सकता है।
प्रस्ताव के मुताबिक संबंधित सांसद मुख्यमंत्री मुख्य सचिव और मध्यप्रदेश के संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के साथ समन्वय करेंगे। प्रदेश में किसी योजना या परियोजना से जुड़ा मामला केंद्रीय मंत्रालय में लंबित होने पर सांसद उसकी स्थिति की जानकारी लेकर दिल्ली में संबंधित अधिकारियों के सामने विषय रख सकेंगे। इससे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को केंद्र तक पहुंचाने और आवश्यक मंजूरियों के लिए नियमित संपर्क बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिम्मेदारियां किस तरह बांटी जाती हैं और मामलों की समीक्षा कितनी नियमित होती है।
मध्यप्रदेश में लोकसभा की सभी 29 सीटों पर भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में पार्टी के पास इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए सांसदों का व्यापक समूह उपलब्ध है। सांसदों के अनुभव उनकी प्रशासनिक समझ और संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी का उपयोग प्रदेश की योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में सड़क परिवहन ग्रामीण विकास कृषि ऊर्जा आवास स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। इनसे संबंधित मध्यप्रदेश के प्रस्तावों पर समन्वय की जिम्मेदारी तय होने से विभागों को अपने मामलों की स्थिति पर नजर रखने में सुविधा मिल सकती है।
इस व्यवस्था से लंबित परियोजनाओं की पैरवी और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को व्यवस्थित करने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि किसी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता या प्रशासनिक मंजूरी जरूरी है तो संबंधित सांसद विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेकर केंद्रीय मंत्रालय के साथ संपर्क कर सकेंगे। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के स्तर पर प्राथमिकता वाले मामलों की समीक्षा होने से राज्य सरकार की जरूरतों और केंद्र के निर्णयों के बीच तालमेल बेहतर करने का प्रयास किया जा सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था का एक अहम पहलू जवाबदेही भी है। मंत्रालयवार जिम्मेदारी तय होने पर यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि किस केंद्रीय मंत्रालय से जुड़े मामलों की पैरवी कौन-सा सांसद कर रहा है और उन पर कितनी प्रगति हुई है। इससे लंबित प्रस्तावों की स्थिति की समीक्षा करना आसान हो सकता है। साथ ही अधिकारियों को विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संपर्क करने के बजाय सांसद के माध्यम से समन्वय का एक अतिरिक्त रास्ता मिलेगा।
फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे किस रूप में लागू किया जाएगा और सांसदों को कौन-कौन से मंत्रालय सौंपे जाएंगे इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। यदि योजना को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाता है तो इससे मध्यप्रदेश की केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
