October 26, 2026

इजरायल चुनाव पर भारत की नजर, IMEC कॉरिडोर से रक्षा साझेदारी तक दांव पर कई अहम हित….

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नई दिल्ली । इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव पर भारत की नजरें टिकी हैं। इस चुनाव को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ भारत और इजरायल के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृषि, नवाचार और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग है। ऐसे में इजरायल में सत्ता परिवर्तन या मौजूदा सरकार की वापसी से इन साझेदारियों की प्राथमिकताओं पर असर पड़ सकता है।

यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा सीरिया में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के बाद पहला आम चुनाव है। नेतन्याहू को बंधकों की रिहाई के मामले को संभालने और गाजा युद्ध की रणनीति को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी हैं। हालांकि, उनके समर्थन में धुर राष्ट्रवादी और धार्मिक राजनीतिक दलों का गठबंधन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी नेतन्याहू के राजनीतिक पक्ष के लिए अहम माना जा रहा है।

चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी के बीच मुकाबले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं और सातवें कार्यकाल के लिए दावेदारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, आइजेनकोट 7 अक्टूबर के हमले, गाजा युद्ध और बंधकों की रिहाई के मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं। हाल के सर्वेक्षणों में उनके आगे रहने की बात कही गई है, हालांकि चुनाव का अंतिम परिणाम मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।

गादी आइजेनकोट इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। वह 2022 में राजनीति में आए और हमास के हमले के बाद नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट का हिस्सा बने। जून 2024 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उनका आरोप रहा है कि सरकार के पास गाजा युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति नहीं है। वह भ्रष्टाचार, राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी नेतन्याहू की आलोचना करते रहे हैं। दिसंबर 2023 में उनके सबसे छोटे बेटे की गाजा में लड़ाई के दौरान मौत हो गई थी। युद्ध में उनके दो भतीजे भी मारे गए।

भारत के लिए चुनाव का एक बड़ा पहलू इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC है। इस प्रस्तावित आर्थिक गलियारे में इजरायल को महत्वपूर्ण भागीदार माना गया है। परियोजना का उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच संपर्क तथा व्यापार को बढ़ावा देना है। यदि नई सरकार की प्राथमिकताओं में इस परियोजना को पर्याप्त महत्व नहीं मिला, तो इसके क्रियान्वयन में देरी की आशंका हो सकती है। इसलिए भारत के लिए इजरायल की नई सरकार की क्षेत्रीय नीति और आर्थिक सहयोग को लेकर रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

व्यापार के मोर्चे पर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और इजरायल के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार लगभग 3.93 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं। भारत इजरायल को रत्न और आभूषण, रिफाइंड पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू लिनेन का निर्यात करता है। वहीं, भारत इजरायल से इंटीग्रेटेड सर्किट, हीरे, उर्वरक, पेट्रोलियम उत्पाद और रक्षा उपकरण आयात करता है। दोनों देशों के बीच रुपये में व्यापार को बढ़ावा देने पर भी बातचीत जारी है।

भारत ने 17 सितंबर 1950 को इजरायल को मान्यता दी थी। वर्ष 1992 में दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए और नियमित दूतावास खोले गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिली है। मोदी 2017 में इजरायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने फरवरी 2026 में भी इजरायल का राजकीय दौरा किया और इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इजरायल में एक लाख से अधिक भारतीय मूल के यहूदी रहते हैं, जबकि भारत में भी इजरायली नागरिक मौजूद हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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