October 26, 2026

पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल

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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर पटना में की गई टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव करेंगे। भाजपा कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने स्थित शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से पैदल मार्च करते हुए कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे। इस प्रदर्शन के जरिए भाजपा कांग्रेस नेतृत्व से बयान पर जवाब मांगने की तैयारी में है।
विवाद की शुरुआत रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर बापू सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी नीतियों पर टिप्पणी कर रहे थे। तभी सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाने वाले हैं। इसके जवाब में खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा। इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया और मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।

मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि क्या खरगे ने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं है तो क्या कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस्तीफा मांगेगी। शिवराज ने टिप्पणी को भारतीय संस्कृति और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब देने की मांग की।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना राजनीति की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। खंडेलवाल ने सवाल किया कि खरगे इस तरह के बयान खुद देते हैं या इसके पीछे गांधी परिवार का कोई निर्देश होता है। उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और व्यवहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीति में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों का मतभेद स्वाभाविक है लेकिन विरोध करते समय भाषा और व्यवहार में गरिमा बनी रहनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना भी जरूरी है।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं विश्वास सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल उचित नहीं है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

पटना के कार्यक्रम में टिप्पणी के बाद हंगामे की खबर भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक जिस व्यक्ति ने बीच में अपनी बात कही थी उसके साथ वहां मौजूद कुछ लोगों ने मारपीट की। बाद में उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी पूरी बात नहीं सुनी गई थी और वह कह रहा था कि विद्रोह के बिना मोदी नहीं जाएंगे। इस घटनाक्रम ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

अब भोपाल में होने वाला भाजपा का प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद का अगला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। कांग्रेस कार्यालय के घेराव के दौरान भाजपा नेता खरगे के बयान को लेकर विरोध दर्ज कराएंगे। दूसरी ओर इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल विवाद का केंद्र बयान की भाषा और राजनीतिक नेताओं से सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा बना हुआ है।

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