इंदौर के हेड कॉन्स्टेबल की 51 प्रॉपर्टी का खुलासा, कीमत 68 करोड़ रुपये, अब ED की जांच की संभावना
लोकायुक्त पुलिस फिलहाल संपत्तियों के दस्तावेज बैंक खातों निवेश और आय के स्रोतों की पड़ताल कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित संपत्तियां किस रकम से खरीदी गईं और क्या उनकी खरीद के लिए इस्तेमाल किया गया पैसा फिरोज खान की ज्ञात वैध आय से मेल खाता है। यदि आय और संपत्तियों के बीच अंतर मिलता है तो उसके कारणों की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संपत्तियों में किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी की भूमिका रही है या नहीं।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद ईडी पर नजर
14 अक्टूबर को लोकायुक्त की टीम ने इंदौर और देवास सहित कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के बाद से मामले में सामने आ रही संपत्तियों और निवेश को लेकर जांच तेज है। अब तक सामने आई 51 अचल संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य 68.01 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच एजेंसी के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया और संबंधित लोगों की घोषित आय कितनी थी।
ईडी की संभावित जांच का आधार मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के प्रावधान हो सकते हैं। हालांकि केवल बड़ी संपत्ति का सामने आना या आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगना अपने आप में मनी लॉन्ड्रिंग साबित नहीं करता। इसके लिए अपराध से अर्जित रकम और संबंधित संपत्तियों के बीच कानूनी रूप से जरूरी संबंध स्थापित करना होगा।
परिवार और परिचितों के नाम वाली संपत्तियां भी जांच में
लोकायुक्त की जांच में परिवार के सदस्यों परिचितों और संबंधित कंपनियों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। देवास जिले के राजोदा गांव में दो महिलाओं रोशनी वर्मा और रानू कुशवाह के नाम पर 1.15 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज मिली है। इसका पंजीयन मूल्य करीब 1.65 करोड़ रुपये और अनुमानित बाजार मूल्य 2.30 करोड़ रुपये बताया गया है।
ऐसी संपत्तियों की जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि जमीन खरीदने के लिए रकम किसने दी। भुगतान किन बैंक खातों से हुआ और संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण किसका है। केवल किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर संपत्ति दर्ज होने से उसे बेनामी या अपराध से जुड़ी संपत्ति नहीं माना जा सकता। इसके लिए वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है।
पीएमएलए के तहत कब हो सकती है कार्रवाई
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोकसेवक द्वारा आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने से जुड़ा अपराध पीएमएलए की अनुसूची में शामिल है। यदि जांच में आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी होती हैं और अपराध से प्राप्त संपत्ति का संबंध स्थापित होता है तो ईडी मामले की जांच कर सकता है। कानून के अनुसार पर्याप्त आधार मिलने पर संपत्ति की अस्थायी कुर्की और अभियोजन जैसी कार्रवाई भी संभव हो सकती है।
फिलहाल इस मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच महत्वपूर्ण चरण में है। संपत्तियों की खरीद लागत वैध आय बैंक खातों ऋण और अन्य वित्तीय स्रोतों का सत्यापन किया जाना बाकी है। आगे की जांच में सामने आने वाले साक्ष्य ही तय करेंगे कि मामला पीएमएलए के दायरे में आता है या नहीं। फिलहाल 51 संपत्तियों और 68.01 करोड़ रुपये के अनुमानित बाजार मूल्य का खुलासा जांच का अहम पहलू बना हुआ है।
